नूतन संवत्सर 2083: 19 मार्च से चैत्री नवरात्रि का शुभारंभ; जानें घटस्थापना मुहूर्त और माता के वाहन के संकेत

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ज्योतिष विशेष (18 मार्च 2026): इस वर्ष प्रतिपदा तिथि के समय में किंचित भिन्नता होने के कारण संशय की स्थिति थी, जिसे पंडित सोहन शास्त्री ने धर्मसिंधु के प्रमाणों के साथ स्पष्ट किया है।

1. तिथि गणना और संवत्सरारम्भ

  • प्रतिपदा का क्षय: प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को प्रातः 06:53 बजे शुरू होगी और अगले दिन सूर्योदय से पहले (20 मार्च, प्रातः 04:52) ही समाप्त हो जाएगी।

  • शास्त्र नियम: चूंकि प्रतिपदा अगले दिन के सूर्योदय को नहीं छू रही है, अतः 19 मार्च, गुरुवार को ही नव संवत्सर का प्रारंभ, नवरात्रि अनुष्ठान और घटस्थापना करना शास्त्र सम्मत है।

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2. माता का आगमन और प्रस्थान: क्या कहते हैं संकेत?

देवी पुराण के अनुसार, सप्ताह के वार से माता के वाहन का निर्धारण होता है:

  • आगमन (पालकी पर): गुरुवार को नवरात्रि शुरू होने के कारण मां ‘पालकी’ पर आ रही हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ‘महामारी’ या ‘आर्थिक अस्थिरता’ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का संकेत माना जाता है।

  • प्रस्थान (हाथी पर): विदाई बुधवार/शुक्रवार को होने से वाहन ‘हाथी’ होगा। यह अत्यंत शुभ संकेत है, जो ‘अत्यधिक वर्षा’, ‘कृषि उन्नति’ और ‘सुख-समृद्धि’ का प्रतीक है।

3. कन्या पूजन: आयु अनुसार फल (श्रीमद् देवी भागवत)

आचार्य जी ने स्पष्ट किया है कि कन्या पूजन में आयु का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • वर्जना: 1 वर्ष (बोध की कमी) और 10 वर्ष से ऊपर की कन्या का पूजन वर्जित है।

  • 2-3 वर्ष (कुमारी/त्रिमूर्ति): आयु, बल, वंश वृद्धि और दुखों के नाश के लिए।

  • 4-8 वर्ष (कल्याणी/कालिका/शाम्भवी): राजसुख, विद्या, विजय और शत्रुओं के नाश के लिए।

  • 9-10 वर्ष (दुर्गा/सुभद्रा): असाध्य रोगों से मुक्ति और सभी मनोरथों की सिद्धि के लिए।

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4. घटस्थापना हेतु शुभ मुहूर्त (19 मार्च 2026)

ब्रह्म योग और मालव्य राजयोग के शुभ संयोग में कलश स्थापना के लिए ये समय श्रेष्ठ हैं:

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| मुहूर्त | समय अवधि |

| :— | :— |

| प्रातः शुभ बेला | सुबह 06:50 से 07:20 तक |

| अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) | दोपहर 12:20 से 01:20 तक |

| लाभ-अमृत बेला | दोपहर 12:50 से 03:50 तक |


Snapshot: चैत्री नवरात्रि 2026

  • प्रारंभ तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार)

  • नया संवत: नूतन संवत्सर 2083

  • विशेष योग: ब्रह्म योग एवं मालव्य राजयोग

  • साधना: नौ स्वरूपों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) की उपासना।

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