उत्तराखंड में सियासी हलचल: दिल्ली में दिग्गजों का जमावड़ा, क्या जल्द होगा धामी कैबिनेट का विस्तार?
देहरादून/दिल्ली: उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। एक ओर जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की ताजपोशी की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए राज्य के लगभग सभी बड़े नेता दिल्ली पहुँच चुके हैं, वहीं दूसरी ओर देहरादून से दिल्ली तक विधायकों की मुख्यमंत्री से मुलाकातों ने ‘मंत्रिमंडल विस्तार’ की चर्चाओं को हवा दे दी है।
🏛️ दिल्ली में उत्तराखंड के दिग्गजों का डेरा
सोमवार को दिल्ली में आयोजित संगठनात्मक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ उत्तराखंड भाजपा की पूरी ‘कोर टीम’ नजर आई:
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सांसद व मंत्री: प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सतपाल महाराज, अजय टम्टा, त्रिवेंद्र सिंह रावत, और अजय भट्ट।
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पूर्व मुख्यमंत्री: रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, और तीरथ सिंह रावत।
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वरिष्ठ विधायक: बंशीधर भगत, मदन कौशिक, और बिशन सिंह चुफाल।
🪑 मंत्रिमंडल में 5 खाली कुर्सियां: किसका चमकेगा भाग्य?
राज्य मंत्रिमंडल में पिछले लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
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कुल स्वीकृत पद: मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री।
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वर्तमान स्थिति: 5 पद रिक्त हैं (3 पद 2022 से खाली थे, जबकि 2 पद चंदनराम दास के निधन और प्रेमचंद्र अग्रवाल के इस्तीफे से रिक्त हुए)।
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चर्चा: अगस्त 2025 से ही विस्तार की चर्चा चल रही है, लेकिन अब माना जा रहा है कि हाईकमान से हरी झंडी मिलते ही नए चेहरों को जगह मिल सकती है।
🤝 मुलाकातों का दौर और सियासी मायने
सोमवार को रायपुर विधायक उमेष शर्मा काऊ, सल्ट विधायक महेश जीना और पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल ने मुख्यमंत्री से भेंट की। हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे ‘लॉबिंग’ से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पर इन मुलाकातों की तस्वीरें सार्वजनिक होते ही कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है।
🎤 भाजपा का पक्ष: ‘विशेषाधिकार मुख्यमंत्री का’
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता और राजपुर विधायक खजानदास ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सभी नेताओं का ध्यान दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष की चयन प्रक्रिया पर है। उन्होंने कहा:
“मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। वे उचित समय पर केंद्रीय नेतृत्व के परामर्श से इस पर निर्णय लेंगे। सरकार का पूरा ध्यान जनसेवा और विकास पर केंद्रित है।”
📈 आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री धामी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तो क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधते हुए नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है, ताकि आगामी चुनावों के लिए संगठन को और मजबूती दी जा सके।

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