चुनाव से पहले दुष्यंत की एंट्री से गरमाई सियासत, भाजपा को मिलेगा फायदा या चारों खाने होगी चित?

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राजू अनेजा,देहरादून/पंतनगर। उत्तराखंड की सियासत में चुनावी सरगर्मियां तेज होते ही एक बार फिर बड़े चेहरों की सक्रियता ने माहौल गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की अचानक सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि उनकी वापसी भाजपा के लिए संजीवनी बनेगी या विपक्ष को नया हथियार दे जाएगी।

पंतनगर में हुआ जोरदार स्वागत, कार्यकर्ताओं में जोश

लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड पहुंचे दुष्यंत गौतम का पंतनगर एयरपोर्ट पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। फूल-मालाओं और नारों के बीच उनकी एंट्री ने यह संकेत दे दिया कि संगठन अब चुनावी मोड में पूरी तरह आ चुका है।

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अंकिता भंडारी केस के बाद बने थे दूरी का कारण

गौरतलब है कि चर्चित उर्मिला सनावर द्वारा बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में नाम लिए जाने के बाद दुष्यंत गौतम ने उत्तराखंड की राजनीति से दूरी बना ली थी। हालांकि उस समय उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश बताया था।

आखिर वापसी के पीछे क्या है पार्टी की रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पकड़ बढ़ाने के लिए अनुभवी चेहरों को फिर से मैदान में उतार रही है। दुष्यंत गौतम को संगठनात्मक कौशल और चुनावी प्रबंधन में माहिर माना जाता है, ऐसे में उनकी सक्रियता को भाजपा के “मास्टर स्ट्रोक” के तौर पर देखा जा रहा है।

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विपक्ष को मिला मुद्दा, घेरने की तैयारी

दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में है। कांग्रेस और अन्य दल इसे नैतिकता से जोड़कर भाजपा पर हमला बोल सकते हैं। अंकिता भंडारी केस पहले ही प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा रहा है, ऐसे में दुष्यंत की वापसी विवादों को फिर हवा दे सकती है।

फायदा या नुकसान—चुनाव में तय होगा असर

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अब देखना यह होगा कि दुष्यंत गौतम की एंट्री भाजपा के लिए कितनी कारगर साबित होती है। क्या उनका अनुभव और रणनीति पार्टी को बढ़त दिलाएगी, या फिर पुराने विवाद भाजपा की राह में रोड़ा बनेंगे—इसका जवाब आने वाले चुनावी रण में ही मिलेगा।
फिलहाल इतना तय है कि दुष्यंत की वापसी ने उत्तराखंड की सियासत में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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