उत्तराखंड में ‘कोल्ड वेव एक्शन प्लान’ की तैयारी: सीएम धामी के निर्देश पर फरवरी 2026 तक भंडारण और स्वास्थ्य सेवाएं अलर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड में इस साल सामान्य से अधिक ठंड रहने की संभावना के मद्देनज़र, राज्य सरकार ने सर्दी के प्रकोप से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जिला स्तरीय अधिकारियों को कोल्ड वेव एक्शन प्लान तैयार करने और उसे राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से साझा करने को कहा है।


🥶 कोल्ड वेव एक्शन प्लान के निर्देश

 

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने वर्चुअल बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए:

  • एक्शन प्लान: सभी जिलों को जल्द से जल्द ‘कोल्ड वेव एक्शन प्लान’ तैयार कर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजना होगा।

  • धनराशि: शीतलहर से निपटने के लिए सभी जिलों को धनराशि मुहैया कराई गई है; यदि अतिरिक्त राशि की आवश्यकता हो तो शासन को मांग भेजी जा सकती है।

  • भंडारण: सभी जिलों में फरवरी 2026 तक खाद्य सामग्री, पेयजल और ईंधन का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए।

  • अलाव और रैन बसेरे: जिन स्थानों पर रात के समय आवाजाही रहती है, वहाँ अनिवार्य रूप से अलाव की व्यवस्था की जाए और रैन बसेरों में सभी सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।

  • जागरूकता: आम जनमानस को शीत लहर से बचाव के लिए जागरूक करने पर जोर दिया जाए, ताकि शीत लहर से किसी की मृत्यु न हो।

  • निराश्रितों को रैन बसेरों में पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।

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🤰 विशेष स्वास्थ्य और यात्रा प्रबंधन

 

  • गर्भवती महिलाओं का डेटाबेस: जनवरी और फरवरी 2026 में जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होनी है, उनका डेटाबेस तैयार किया जाए।

  • सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना: बर्फबारी से आवाजाही प्रभावित होने वाले क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को समय रहते अस्पताल या सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की योजना बनाई जाए।

  • स्वास्थ्य सेवाएं: सभी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को चौबीस घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाए।

  • शीतकालीन यात्रा: शीतकालीन यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को ठंड में असुविधा न हो। मौसम और सड़कों की स्थिति देखकर ही यात्रियों को आगे रवाना किया जाए और मार्ग बाधित होने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रोका जाए।

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⚠️ पालाग्रस्त क्षेत्रों के लिए निर्देश

 

  • सड़कें चिह्नित करें: पालाग्रस्त (Frost-affected) सड़कों को चिह्नित कर साइन बोर्ड लगाए जाएँ ताकि लोग संभलकर वाहन चलाएँ।

  • छिड़काव: ऐसी सड़कों पर चूने और नमक का छिड़काव किया जाए।

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सचिव ने चेतावनी दी कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जनवरी 2026 में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने और शीत लहर के लंबे अवधि तक बने रहने की संभावना व्यक्त की है।