धारचूला: दारमा घाटी में ‘हिमनद के राजा’ की धमक; युवाओं की टीम ने कैमरे में कैद किया हिम तेंदुआ

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धारचूला (पिथौरागढ़): उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए दारमा घाटी के युवाओं का जुनून रंग ला रहा है। दुर्गम पहाड़ियों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच ‘हिडेन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड’ टीम पिछले सात वर्षों से हिम तेंदुओं (Snow Leopard) और दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में जुटी है।


📸 2026 में फिर दिखा ‘पहाड़ों का भूत’

टीम के सदस्यों ने हाल ही में दारमा घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सफलता हासिल की है:

  • ताजा साइटिंग: 28 जनवरी 2026 को टीम ने समुद्र तल से 3000-4500 मीटर की ऊंचाई पर हिम तेंदुआ और दुर्लभ स्नो कॉक (हिमालयन स्नोकॉक) को देखा।

  • ऐतिहासिक रिकॉर्ड: टीम ने पहली बार 2 फरवरी 2022 को हिम तेंदुए का वीडियो बनाया था। अब 2026 में जयेंद्र फिरमाल ने इसकी नई तस्वीरें खींचकर वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है।

  • इको-सिस्टम का आधार: विशेषज्ञों के अनुसार, हिम तेंदुआ उच्च हिमालयी खाद्य श्रृंखला का शीर्ष शिकारी है। इसका दिखना इस बात का प्रमाण है कि इको-सिस्टम में ‘ब्लू शीप’ और ‘हिमालयन थार’ जैसे वन्यजीवों की संख्या संतुलित है।

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🌿 विविधता से भरपूर दारमा घाटी

यह क्षेत्र कई दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों का घर है:

  • वन्यजीव: हिम तेंदुआ, काला भालू, हिमालयन थार और ब्लू शीप।

  • पक्षी: हिमालयन मोनाल, बीयर्डेड वल्चर (दाढ़ी वाला गिद्ध), चुक्कार, फिंच और स्नो कॉक।

  • वनस्पति: टीम वन्यजीवों के साथ-साथ विलुप्त हो रहे भोजपत्र के वृक्षों और प्राकृतिक औषधियों के संरक्षण पर भी काम कर रही है।

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🤝 युवाओं की पहल: वाइल्डलाइफ टूरिज्म से रोजगार

जयेंद्र सिंह, नितेश सिंह, असमित सिंह, भीम सिंह और दिनेश सिंह जैसे युवाओं का उद्देश्य केवल जानवरों को बचाना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को ‘वाइल्डलाइफ टूरिज्म’ से जोड़ना भी है:

  1. शिकार पर लगाम: जब स्थानीय युवाओं को पर्यटन से रोजगार मिलेगा, तो वे शिकार जैसी अवैध गतिविधियों से दूर रहेंगे।

  2. संसाधनों की मांग: टीम का मानना है कि यदि सरकार उन्हें आधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए, तो वे इस दुर्गम क्षेत्र की बेहतर निगरानी कर सकते हैं।

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🎙️ अधिकारियों का पक्ष

“उच्च हिमालय में हिम तेंदुए की मौजूदगी स्वाभाविक है। इसके संरक्षण के लिए उच्च स्तर पर कार्ययोजना बनाई जा रही है। चूंकि यह संरक्षित श्रेणी का जीव है, इसलिए इसकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”

राजकुमार, उप प्रभागीय वनाधिकारी, पिथौरागढ़

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