
राजू अनेजा,रुद्रपुर। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की लालच में लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसका हैरान करने वाला मामला ऊधमसिंह नगर में सामने आया है। यूपी से आकर गदरपुर में बसे एक व्यक्ति ने जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अपने ही पिता का नाम बदल दिया। जांच की आंच पहुंची तो कार्रवाई के डर से वह खुद एसडीएम के सामने पहुंच गया और पूरी हेराफेरी कबूल कर ली।
मामला तब उजागर हुआ जब हल्द्वानी के बनभूलपुरा में फर्जी जाति, स्थायी निवास और अन्य प्रमाणपत्र बनाए जाने के प्रकरण के बाद राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बने दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर में संदिग्ध दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान जांच टीम को गदरपुर क्षेत्र के लगड़ाभोज व्रीराई निवासी मोहम्मद हनीफ के प्रमाणपत्रों पर शक हुआ।
जांच की भनक लगते ही हनीफ खुद एसडीएम के समक्ष पहुंच गया। उसने स्वीकार किया कि जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसने किफायत अली पुत्र ददली अली के नाम का इस्तेमाल किया, जबकि उसके असली पिता कीफात शाह पुत्र शायद अली शाह हैं। जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसने वर्ष 1989 का आनंदखेड़ा रामबाग निवासी किफायत अली के नाम का राशन कार्ड भी प्रस्तुत किया था, जबकि इस नाम से संबंधित उसके पास कोई अन्य प्रमाण नहीं था।
यह है नियम
राज्य में जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए यह अनिवार्य है कि आवेदक या उसके पूर्वज राज्य गठन से कम से कम 15 वर्ष पहले यानी वर्ष 1985 से पहले उत्तराखंड के निवासी रहे हों। ऐसे में हनीफ के प्रमाणपत्र बनने को लेकर तहसील स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जांच में खुली परतें
एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश पर संदिग्ध जाति, आय और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि हनीफ ने गलत दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र बनवाया था। मामले को स्क्रूटनी कमेटी के समक्ष रखा गया, जिसने उसका प्रमाणपत्र निरस्त करने की संस्तुति कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है।
जनसेवा केंद्र के जरिए बनवाया प्रमाणपत्र
हनीफ का कहना है कि उसने यह जाति प्रमाणपत्र संजय सैनी के जनसेवा केंद्र के माध्यम से बनवाया था। दादा और पिता के नाम में अंतर होने के कारण उसे पकड़े जाने का डर सता रहा था।
पांच जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने की संस्तुति
उधर एडीएम पंकज उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई जनपद स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक में गदरपुर क्षेत्र के एक ही परिवार के पांच जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने की संस्तुति की गई।
बैठक में किच्छा के एक मामले में अभिलेखों के सत्यापन के लिए तहसीलदार किच्छा की अध्यक्षता में समिति गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। वहीं हाईकोर्ट में दायर एक वाद के अनुपालन में दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया।
प्रशासन अब फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
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