आज सूर्य ग्रहण पर ‘आदित्य L-1’ की नजर: अंटार्कटिका में दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’, दुनिया देखेगी इसरो का कमाल

खबर शेयर करें -

नैनीताल | 17 फरवरी, 2026: आज अंतरिक्ष में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है। साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) लगने वाला है, जिसे ‘आग का छल्ला’ या ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। इस घटना पर पूरी दुनिया की नजरें भारत के सौर मिशन ‘आदित्य L-1’ पर टिकी हैं, क्योंकि यह मिशन बिना किसी बाधा के इस ग्रहण को अंतरिक्ष से रिकॉर्ड करेगा।


🕒 सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)

एरीज (ARIES) के पूर्व निदेशक और सौर विज्ञानी डॉ. वहाबउद्दीन के अनुसार, ग्रहण की समय-सारणी इस प्रकार है:

  • प्रारंभ: दोपहर 3:26 बजे

  • चरम (सर्वाधिक ग्रहण): शाम 5:42 बजे

  • समाप्ति: रात 7:57 बजे

यह भी पढ़ें 👉  अज्ञात वाहन की टक्कर से बिंदुखत्ता निवासी की मौत; पंतनगर से ड्यूटी कर लौट रहे थे भुवन जोशी

❄️ कहाँ दिखेगा यह नजारा?

यह ग्रहण पृथ्वी के बहुत सीमित हिस्से में ही दिखाई देगा:

  • मुख्य क्षेत्र: पूर्ण वलयाकार रूप केवल अंटार्कटिका के बर्फीले भूभाग से दिखेगा।

  • आंशिक ग्रहण: दक्षिणी अफ्रीका, चिली और अर्जेंटीना के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण नजर आएगा।

  • भारत की स्थिति: यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन भारतीय सैटेलाइट इसका गवाह बनेगा।


🛰️ आदित्य L-1: क्यों खास है इस बार का मिशन?

धरती पर ग्रहण के दौरान अंधेरा छा जाता है, लेकिन अंतरिक्ष में लैग्रेंज पॉइंट 1 (L1) पर तैनात भारत का आदित्य सैटेलाइट हमेशा सूर्य के सामने रहता है।

  • निरंतर निगरानी: आदित्य L-1 बिना पलक झपकाए सूर्य की गतिविधियों को देख सकता है। यह ग्रहण की वे तस्वीरें और डेटा लेगा जो धरती से लेना संभव नहीं है।

  • सौर सक्रियता का चरम: वर्तमान में सूर्य अपनी सक्रियता के उच्चतम स्तर (Solar Maximum) पर है। ऐसे समय में ग्रहण का अध्ययन सौर वैज्ञानिकों के लिए डेटा का खजाना साबित होगा।

  • कोरोना का अध्ययन: ग्रहण के दौरान सूर्य के बाहरी वातावरण यानी ‘कोरोना’ को ऑब्जर्व करने का यह बेहतरीन मौका है।

यह भी पढ़ें 👉  अपनी ही सरकार में तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे पूर्व भाजपा विधायक शुक्ला, बेहड़ का तीखा पलटवार — “हाईकोर्ट में मामला लंबित, यह सीधा न्यायालय का अनादर”

📊 ग्रहण के रोचक तथ्य

विशेषता विवरण
अवधि (पूर्ण ग्रहण) अंटार्कटिका के ऊपर मात्र 2 मिनट
पाथ (रास्ता) ग्रहण का पथ 4282 किमी लंबा और करीब 616 किमी चौड़ा है।
दृश्यता वलयाकार रूप में सूर्य एक चमकती हुई अंगूठी (Ring) की तरह दिखेगा।
यह भी पढ़ें 👉  अपनी ही सरकार में तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे पूर्व भाजपा विधायक शुक्ला, बेहड़ का तीखा पलटवार — “हाईकोर्ट में मामला लंबित, यह सीधा न्यायालय का अनादर”

वैज्ञानिक महत्व: डॉ. वहाबउद्दीन का कहना है कि यह वर्ष आदित्य L-1 के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सौर सक्रियता के इस दौर के बाद अगली बड़ी गतिविधि के लिए कई वर्षों का इंतजार करना होगा।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad