
राजू अनेजा,नैनीताल।अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि रंजन की अदालत ने आधार कार्ड अपडेट कराने तल्ला रामगढ़ गई युवती के साथ छेड़खानी व अभद्रता के मामले में दोषी डंपर चालक को दो साल का सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उत्तराखंड राज्य पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को मुआवजा दिलाने के आदेश भी पारित किए हैं।
सहायक अभियोजन अधिकारी सुमित कन्याल ने बताया कि 19 सितंबर 2024 को रामगढ़ क्षेत्र की एक युवती अपने पिता के साथ आधार कार्ड अपडेट कराने तल्ला रामगढ़ गई थी। आधार अपडेट के बाद पिता ने बेटी को घर के लिए भेज दिया। इसी दौरान दोपहर में युवती ने पिता को फोन कर बताया कि डंपर संख्या यूके-04-सीबी-1049 के चालक चंदन सिंह डंगवाल पुत्र नारायण सिंह, निवासी पोस्ट भटेलिया, थाना मुक्तेश्वर ने सलिया के पास उसे जबरन डंपर में बैठाया और उसके साथ छेड़खानी व अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर चालक ने युवती को गाड़ी से धक्का देकर नीचे गिरा दिया और मौके से फरार हो गया।
पीड़िता के पिता की तहरीर पर भवाली कोतवाली में आरोपित डंपर चालक के खिलाफ धारा-354 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से अपराध सिद्ध करने के लिए पीड़िता, उसके पिता, तीन महिला उप निरीक्षकों सहित कुल सात गवाहों के बयान दर्ज कराए गए तथा दस्तावेजी साक्ष्य और मोबाइल फोन भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। वहीं, पीड़िता के पिता ने कोर्ट में बयान दिया कि वह बेटी को स्कूटी से लेकर गया था और आरोपी ने उसकी बेटी का मोबाइल भी पटक दिया था। घटना की सूचना सबसे पहले कैंची धाम चौकी में दी गई थी।
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने उसे जबरन डंपर में बैठाया, छेड़खानी करते हुए उसके निजी अंगों को छुआ। जब उसने विरोध कर डंपर का दरवाजा खोलकर बाहर निकलने की कोशिश की तो आरोपी ने उसे धक्का देकर गाड़ी से नीचे गिरा दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने आरोपी को धारा-357 और 427 से दोषमुक्त करते हुए धारा-354 के तहत दोषी करार दिया और दो साल का सश्रम कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले को महिला सुरक्षा के मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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