उत्तराखंड में 11 नए जिलों की मांग: ‘जिला बनाओ संघर्ष समिति’ का आंदोलन का अल्टीमेटम

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उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग एक बार फिर गरमा गई है। ‘जिला बनाओ संघर्ष समिति’ ने प्रदेश के संतुलित विकास और प्रशासनिक सुगमता के लिए 11 नए जिलों की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है।

यहाँ इस महत्वपूर्ण मांग और प्रस्तावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

देहरादून (6 अप्रैल 2026): उत्तराखंड में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है। समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल का कहना है कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास का लाभ पहुँचाने के लिए नए जिलों का गठन अब अनिवार्य हो गया है।

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1. नए जिलों की मांग के पीछे मुख्य तर्क

समिति ने नए जिलों की आवश्यकता के लिए निम्नलिखित प्रमुख कारण गिनाए हैं:

  • प्रशासनिक सुगमता: वर्तमान में जिला मुख्यालयों से कई क्षेत्रों की दूरी बहुत अधिक है, जिससे आम जनता को छोटे कार्यों के लिए भी लंबा सफर तय करना पड़ता है।

  • पलायन पर रोक: नए जिलों के बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं का पलायन रुकेगा।

  • त्वरित न्याय और सेवा: स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय जैसी बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक सुलभ होंगी।

  • आपदा प्रबंधन: उत्तराखंड एक आपदा संवेदनशील राज्य है; जिला मुख्यालय पास होने से राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी।

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2. प्रस्तावित नए जिले और क्षेत्र

समिति ने राज्य के विभिन्न जनपदों से निम्नलिखित क्षेत्रों को नया जिला बनाने का प्रस्ताव दिया है:

वर्तमान जनपद प्रस्तावित नए जिले/क्षेत्र
उत्तरकाशी पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र
टिहरी नरेंद्र नगर, प्रतापनगर
पौड़ी कोटद्वार, बीरोंखाल
चमोली गैरसैंण
नैनीताल हल्द्वानी, रामनगर
हरिद्वार रुड़की
देहरादून विकासनगर, चकराता
अल्मोड़ा रानीखेत
पिथौरागढ़ डीडीहाट
ऊधमसिंह नगर काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर

3. ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास’ का लक्ष्य

प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि संसाधनों के असमान वितरण के कारण दुर्गम क्षेत्रों की उपेक्षा हो रही है। नए जिलों के गठन से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं देती है, तो समिति पूरे राज्य में एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।

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4. युवा और महिला सशक्तिकरण

समिति का मानना है कि नए प्रशासनिक ढांचे के निर्माण से सरकारी कार्यालयों और सेवाओं का विस्तार होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से युवाओं को रोजगार मिलेगा और महिलाओं की भागीदारी भी शासन-प्रशासन में बढ़ेगी।

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