उत्तराखंडी फिल्म ‘यारसा गंबू’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बटोरी सुर्खियां: NFDC ने ‘स्पेशल मेंशन अवार्ड’ से नवाजा
उच्च औषधीय गुणों से भरपूर, उच्च हिमालय की अनूठी जड़ी-बूटी ‘कीड़ाजड़ी’ पर आधारित उत्तराखंडी फिल्म ‘यारसा गंबू’ (Yarsa Gumby) रिलीज़ से पहले ही चर्चा में आ गई है।
🏆 उपलब्धि और सम्मान
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पुरस्कार: राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) ने फिल्म को पोस्ट प्रोडक्शन श्रेणी में ‘स्पेशल मेंशन अवार्ड’ प्रदान किया है।
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अंतर्राष्ट्रीय चयन: इसका चयन साउथ एशिया की टॉप-फाइव फिल्मों में किया गया है, जो यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली पर्वतीय फिल्म है।
🏔️ फिल्म का कथानक और संदेश
फिल्म को सीमांत दारमा घाटी और पंचाचुली के बुग्यालों में फिल्माया गया है। इसके निर्माता ने निम्नलिखित पहलुओं को बखूबी दर्शाया है:
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संघर्ष: उच्च हिमालय की दुश्वारियों और कीड़ाजड़ी संग्रहण के लिए रंग्पा समाज के मेहनतकश ग्रामीणों का संघर्ष।
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संस्कृति: हिमालयी बाशिंदों की जीवटता, रीति-रिवाज, संस्कृति और संघर्ष की झलक।
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संदेश: उत्तराखंड की इस दुर्लभ हिमालयी संपदा को देश की प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने और इसे सीमांत के स्वरोजगार से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश।
👥 निर्माण टीम और कलाकार
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निर्माता: कुंदन सिंह बिष्ट (सूर्यमंदिर समिति कटारमल, अल्मोड़ा के सदस्य)।
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निर्देशक/पटकथा: कुंदन सिंह बिष्ट और युवा फिल्मकार समर बेलवाल।
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अवधि: 80 मिनट (फिल्म को बनाने में पाँच माह लगे)।
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कलाकार: अंतर्राष्ट्रीय कलाकार रूपेश लामा और संगीता थापा महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, साथ ही करीब ढाई वर्षीय लव्यांशी दुग्ताल और अभिराज दत्ताल भी अहम किरदारों में हैं। फिल्म में स्थानीय महिला-पुरुषों और बच्चों ने भी अभिनय किया है।
निर्माता कुंदन सिंह और निर्देशक समर बेलवाल ने बताया कि ‘यारसा गंबू’ महज एक फिल्म नहीं, बल्कि हिमालयी बाशिंदों के संघर्ष और अनसुनी कहानी बयां करती है।
🌐 आगे की योजना
गोवा में आयोजित IFFI समारोह में इस फिल्म को साउथ एशिया की टॉप-फाइव फिल्मों में चयनित किया गया है। अब इसे इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा।

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