भालू के हमले में ग्राम प्रधान और वनकर्मी समेत 3 घायल; डीएफओ पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बिना हथियार टीम भेजने का आरोप

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टिहरी गढ़वाल के थौलधार ब्लॉक से वन विभाग की बड़ी लापरवाही और भालू के आतंक की खबर सामने आई है। सुल्याधार के पास भालू ने एक साथ तीन लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने डीएफओ (DFO) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें तत्काल हटाने की मांग की है।

यहाँ इस हमले और उसके बाद उपजे जनाक्रोश का विस्तृत विवरण दिया गया है:

टिहरी गढ़वाल (3 अप्रैल 2026): थौलधार ब्लॉक के सुल्याधार क्षेत्र में भालू की मौजूदगी से दहशत का माहौल है। गुरुवार को हुई इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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1. घटना का क्रम: रेस्क्यू के बजाय खुद बने शिकार

  • स्थान: चंबा-धरासू मोटर मार्ग पर स्थित थापली तोक।

  • कैसे हुआ हमला: क्षेत्र में भालू की सक्रियता की सूचना पर ग्राम प्रधान और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची थी। तभी घात लगाकर बैठे भालू ने अचानक हमला बोल दिया।

  • घायलों की सूची: 1. युद्धवीर सिंह रावत (ग्राम प्रधान, बेरगणी)

    2. अजयपाल पंवार (फॉरेस्टर/वन दरोगा)

    3. विनोद सिंह रावत (ग्रामीण)

  • उपचार: तीनों घायलों को ग्रामीणों की मदद से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

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2. डीएफओ के खिलाफ भारी आक्रोश और धरना

घटना के बाद गुस्साए ग्रामीण जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों और जनप्रतिधियों के आरोप बेहद गंभीर हैं:

  • बिना तैयारी टीम भेजना: ग्रामीणों का आरोप है कि डीएफओ ने भालू जैसे हिंसक जानवर के रेस्क्यू के लिए कर्मचारियों को बिना किसी आधुनिक हथियार या सुरक्षा उपकरण के, केवल लाठी-डंडों के भरोसे भेज दिया।

  • फोन काटने का आरोप: घायल ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने खतरे की सूचना देने के लिए डीएफओ को फोन किया, तो अधिकारी ने बीच में ही फोन काट दिया।

  • पूर्व कैबिनेट मंत्री का हस्तक्षेप: पूर्व मंत्री दिनेश धनै ने भी डीएफओ के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए उन्हें तत्काल मुख्यालय से हटाने की मांग की है।

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3. ‘रिपीट अटैक’ से बढ़ी दहशत

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व भी इसी स्थान पर भालू ने एक महिला पर हमला किया था। बार-बार हो रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग द्वारा ठोस सुरक्षा उपाय (जैसे पिंजरा लगाना या गश्त बढ़ाना) न किए जाने से लोग खौफजदा हैं।

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