
राजू अनेजा,काशीपुर।ओवरलोड डंपरों से हो रही लगातार मौतों के विरोध में काशीपुर का माहौल उस वक्त उबल पड़ा जब मृतक के परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर धरना शुरू कर दिया। मातम, आंसुओं और गुस्से के बीच नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी धरना स्थल पर पहुंचे और परिजनों के साथ जमीन पर बैठकर प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया।
धरना स्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों से यशपाल आर्य ने तीखे लहजे में कहा—
“खड़े-खड़े बात नहीं होगी।
सामने आओ, जमीन पर बैठो।
मेरे सामने आंख नीचे रखकर बात करो।”
उनके इन शब्दों के साथ ही धरना स्थल पर सन्नाटा छा गया और प्रशासनिक अधिकारियों के पास जनता के सवालों का कोई ठोस जवाब नजर नहीं आया।
“क्या आप चाहते हैं कि यहां सब लोग मर जाएं?”
नेता प्रतिपक्ष ने ओवरलोड डंपरों को मौत की मशीनें करार देते हुए कहा—
“क्या आप लोग चाहते हैं कि यहां सब लोग मर जाएं?
पैसे के दम पर, पैसे के बल पर क्या किसी की जिंदगी बर्बाद कर दोगे?”
उन्होंने अफसरों से सीधा सवाल किया—
“एक हफ्ते में पांच मौतें हो चुकी हैं।
किसी का बाप गया, किसी का भाई, किसी का बेटा, किसी का पति।
क्या आप उन घरों में गए जिनकी वजह से ये मौतें हुईं?
जवाब दीजिए—जिम्मेदारी कौन लेगा?”
ओवरलोड डंपर बन चुके हैं ‘मौत की मशीनें’
यशपाल आर्य ने बताया कि बीते दो-तीन दिनों में ढकिया, कुंडेश्वरी, कुंडेश्वरा और ब्रह्मनगर क्षेत्रों में खनन वाहनों से पांच निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है।
उन्होंने कहा—
“ओवरलोड डंपरों से जिस रफ्तार से लोग मारे जा रहे हैं, उतनी मौतें अब युद्ध या प्राकृतिक आपदा में भी नहीं होतीं।
ये हादसे नहीं, सरकार और प्रशासन की लापरवाही से हो रही जनहत्याएं हैं।”
परिजनों के साथ धरना, इलाके में तनाव
मृतक के परिजन शव के साथ धरने पर डटे रहे और ओवरलोड डंपरों पर तत्काल रोक, दोषी चालक की गिरफ्तारी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते रहे। धरना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
चेतावनी—अब संघर्ष सड़क से सदन तक
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि
ओवरलोड डंपरों पर तुरंत प्रतिबंध नहीं लगाया गया,
खनन वाहनों की कड़ी निगरानी नहीं की गई,
ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया,
और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई,
तो जनता के साथ मिलकर सड़क से सदन तक बड़ा जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
यह केवल एक धरना नहीं,
यह प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ उठती जनता की आवाज़ है।
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