केदारनाथ आपदा की भयावह यादें हुई ताजा, आइए जानते हैं उत्तराखंड में कब-कब प्राकृतिक आपदाओं ने दस्तक दी।

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उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले में रविवार को ग्लेशियर (Glacier) टूटने से नदियों में आई विकराल बाढ़ ने आठ साल पहले की केदारनाथ आपदा की भयावह यादें फिर से ताजा कर दीं। हालांकि, गनीमत यह रही कि साल 2013 की तरह इस बार बारिश नहीं थी और आसमान पूरी तरह साफ था जिससे हेलीकॉप्टर उड़ाने में मौसम बाधा नहीं बना। एसडीआरएफ की टीमें जल्द ही प्रभावित स्थान पर पहुंच गईं और बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया

साल 2013 में आई आपदा में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को आपदा की गंभीरता को समझने में समय लगने के कारण तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी जिसके चलते उन्हें सत्ता से भी हाथ धोना पड़ा था। दूसरी तरफ, मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बिना समय गंवाए आपदा की सूचना मिलते ही तत्काल हेलीकॉप्टर से प्रभावित स्थल पर पहुंचे और मौके का जायजा लिया। वे खुद बचाव और राहत कार्य कार्य की निगरानी कर रहे हैं। इधर दिल्ली में प्रधानमंत्री भी पूरी घटना पर पल-पल की नजर रखे हुए हैं। आइए जानते हैं उत्तराखंड में कब-कब प्राकृतिक आपदाओं ने दस्तक दी।

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साल 1991 उत्तरकाशी का भूकंप : अविभाजित उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 1991 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया। इस आपदा में कम से कम 768 लोगों की मौत हुई और हजारों घर तबाह हो गए।

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साल 1998 माल्पा भूस्खलन : पिथौरागढ़ जिले का छोटा सा गांव माल्पा भूस्खलन के चलते बर्बाद हुआ। इस हादसे में 55 कैलाश मानसरोवर श्रद्धालुओं समेत करीब 255 लोगों की मोत हुई। भूस्खलन से गिरे मलबे के चलते शारदा नदी बाधित हो गई थी।

साल 1999 चमोली भूकंप : चमोली जिले में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप ने 100 से अधिक लोगों की जान ले ली। पड़ोसी जिले रुद्रप्रयाग में भारी नुकसान हुआ था। भूकंप के चलते सड़कों एवं जमीन में दरारें आ गई थीं।

साल 2013 उत्तर भारत बाढ़ : जून में एक ही दिन में बादल फटने की कई घटनाओं के चलते भारी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं थीं। राज्य सरकार के आंकलन के मुताबिक, माना जाता है कि 5,700 से अधिक लोग इस आपदा में जान गंवा बैठे थे। सड़कों एवं पुलों के ध्वस्त हो जाने के कारण चार धाम को जाने वाली घाटियों में तीन लाख से अधिक लोग फंस गए थे।

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