उत्तराखंड : तैयार बैठी थी दुल्हन पर बिना दुल्हन के गांव लौटा दूल्हा, हर तरफ चीख-पुकार और चीत्कार

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बीरोंखाल ब्लॉक के कांडा मल्ला गांव की बेटी रचना के घर पर मंगलवार सुबह से शादी की चहल पहल थी।

शादी के बाद पति के साथ अपने भविष्य के सपने बुन रही दुल्हन रचना को यह नहीं मालूम था कि उसके घर आने वाले बरातियों के साथ यह हादसा हो जाएगा और उसके घर तक बरात नहीं पहुंच पाएगी। जहां कई दिनों से शादी की तैयारियां चल रही थीं वहां उसके घर ही नहीं पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है। ग्राम प्रधान जितेंद्र पटवाल ने बताया कि मंगलवार शाम सात बजे कांडा मल्ला गांव में बरात के स्वागत की तैयारियां जोरों पर थीं। बरातियों के स्वागत के लिए गांव के बाहर गेट सजाया गया था। दुल्हन रचना के घर को लड़ियों से सजाया गया था। हलवाई पकवान बनाने में व्यस्त थे। अपने कमरे में रचना शादी का जोड़ा पहनकर सजी खड़ी थी। तभी गांव के एक व्यक्ति के फोन पर घंटी बजी और एक मनहूस खबर आई।

परिवार के लोगों को गांव से 500 मीटर पहले बरात की बस के खाई में गिरने और बरातियों के लापता होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। दूल्हा संदीप के सलामत होने की सूचना पर लोगों ने कुछ राहत की सांस ली लेकिन बरात की बस में दूल्हे के परिजनों और अन्य बरातियों की मौत की खबर ने सबको चौंका दिया।

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बरात की तैयारी में लगे लोग कामकाज छोड़कर दुल्हन के आंगन में एकत्र हो गए तो कई लोग घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। दुल्हन देर रात तक दूल्हे का इंतजार करती रही लेकिन हालात ऐसे हो गए कि दूल्हा दुल्हन के गांव तक नहीं पहुंच सका। भीषण हादसे के बाद वह घायलों को अस्पताल पहुंचाकर अपने घर लौट गया। किसी को भी यह अंदेशा नहीं था कि बेटी के घर आने वाली बरात घर ही नहीं पहुंचेगी।

ताछला गांव के आठ लोगों की जान गई
बीरोंखाल ब्लॉक के सिमड़ी में हुए बस हादसे में यमकेश्वर के ताछला गांव के आठ लोगों की जान चली गई। अधिकांश लोग परिवार की शादी में शामिल होने के लिए लालढांग पहुंचे थे और उसके बाद बरात के साथ कांडा गांव के लिए निकले थे। मृतकों में एक ही परिवार के पांच लोग शामिल हैं। गांव में छोटे बच्चे और महिलाएं ही हैं। बस हादसे से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

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सिमड़ी में हुए बस हादसे में ताछला गांव के चंद्रप्रकाश के परिवार के पांच लोगों की जान चली गई। उनके परिवार से पुत्र सतीश, पुत्रवधू वर्षा, पोता अभ्यांश, दूसरा पुत्र अनिल और उसकी पत्नी अंजलि विवाह समारोह में शामिल होने के लिए लालढांग गए थे।

मृतक सतीश पीआरडी का जवान था जबकि उसका भाई अनिल हरिद्वार में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। इसके अलावा गांव के रमेश, सुमनलाल और अमन की भी हादसे में मौत हो गई। गांव में लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। मातम के कारण गांव में सुबह से चूल्हे नहीं जले। परिजनों को सांत्वना देने के लिए आसपास के गांवों से लोगों का तांता लगा रहा। देवदूत बनकर पहुंचे जय कालिंका टैक्सी यूनियन के चालक
वहीं, जय कालिंका टैक्सी यूनियन से जुड़े वाहन चालक बस हादसे के घायलों के लिए देवदूत बनकर मौके पर पहुंचे। इन लोगों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर घायलों को खाई से निकाला और सड़क तक पहुंचाया।

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ग्राम प्रधान संघ बीरोंखाल के ब्लॉक अध्यक्ष ओमपाल बिष्ट ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही मंगलवार रात यूनियन से जुड़े करीब 20-25 वाहन चालक बीरोंखाल से अपनी गाड़ियां लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद सभी ड्राइवरों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर घायलों की खोज शुरू की।

अंधेरा अधिक होने के कारण मोबाइल की लाइटों और टॉर्च की मदद से घायलों को ढूंढने में काफी मुश्किलें आईं। एसडीआरएफ के पहुंचने तक इन लोगों ने नौ लोगों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचा दिया था। एसडीआरएफ के पहुंचने के बाद भी ये लोग मदद में जुटे रहे। फोटोग्राफर पंकज नारंग और जयपाल नेगी ने भी घायल होने के बावजूद अन्य घायलों को सड़क तक पहुंचाया।

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