कैंची धाम मेला में उमड़ रही भक्तों की भीड़, किया गया रूट डायवर्ट, जानें आप भी

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नैनीताल. कोरोना संक्रमण की वजह से उत्तराखंड की पर्यटन नगरी में 2 साल बाद कैंची धाम स्थापना दिवस के मौके पर मेले का आयोजन हो रहा है. इस मेले में आज 15 जून की सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं और माना जा रहा है कि आज करीब 2 लाख लोग यहां जुटेंगे. इस मेले की व्यवस्थाओं के लिहाज़ से ट्रैफिक रूट और डायवर्शन को लेकर बड़ा फेरबदल किया गया है. इस मेले के लिए क्या खास इंतज़ाम हैं और इस धाम की क्या विशेष मान्यता है? देखिए.

मेले में भीड़ को मैनेज करने के लिए पार्किंग और वाहनों की आवाजाही के लिए पुरानी व्यवस्था को ही लागू किया गया है, जिसमें भवाली से रामगढ़ होते हुए अल्मोड़ा वाहन जाएंगे तो अल्मोड़ा क्वारब पुल से भी यही व्यवस्था हल्द्वानी आने वालों के लिए रहेगी. बाइक और निजी वाहनों को 15 जून को कैंची जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. एसडीएम कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं को शटल सेवा की सुविधा देने और डॉक्टरों की टीम के तैनात रहने की बात भी कह चुके हैं.

बाबा नीब करौरी के दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्त
— कैची धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए पुलिस ने रूट डायवर्ट किया है.— अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जाने वाले वाहन वाया रामगढ़ जाएंगे.— भवाली से होगा डायवर्जन.— पहाड़ से हल्द्वानी आने वाले वाहन क्वारब, रामगढ़ होते हुए भवाली पहुंचेंगे.— कैंची धाम जाने के लिए शटल सेवा लगाई गई है.— करीब 20 किलोमीटर का क्षेत्र कोर जोन में तब्दील कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था बाबा का जन्म

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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में ब्राम्हण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीब करौरी में कठिन तप करके स्वयं सिद्धि हासिल की।

निर्वाण दो साल पहले बाबा ने बनवाया कैंची धाम

बाबा जन्म से ही संत थे। जहां भी जाते यज्ञ और भंडारा कराते। यज्ञ देवताओं के लिए व भंडारा सामान्य मनुष्यों के लिए। उन्होंने तमाम हनुमान मंदिर स्थापित कराए। निर्वाण से पूर्व दो आश्रम भी बनवाए। पहला आश्रम कैंची Nainital तो दूसरा वृंदावन (मथुरा) में।

माना जाता है हनुमान जी का अवतार

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंचीधाम मंदिर की ख्याति जितनी देश में है उतनी ही विदेशों में भी। मंदिर के संस्थापक बाबा नीब करौरी महराज को हनुमान जी का अवतार माना जाता है।

जुकरबर्ग ने पीएम मोदी से किया था जिक्र

27 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी फेसबुक के मुख्यालय में थे। इस दौरान जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की वजह बताई। उन्होंने कहा कि जब वे इस संशय में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के एक मंदिर में जाने की सलाह दी थी।

जुकरबर्ग को भारत में मिली अध्यात्मिक शांति

जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान वह दो दिन उस मंदिर में भी रुके। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली।

फोटो देख सम्माेहित हो गईं थी जूलिया

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अपनी फिल्‍म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं जूलिया रॉबर्ट ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था। ऑस्कर विजेता हॉलीवुड की इस अदाकारा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह नीम करौली बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर डाला।

देवभूमि में कैंची धाम का महत्व
उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है और यहां धर्मिक स्थल आस्था के बड़े केन्द्र हैं. यही कारण हैं कि देश और दुनिया भर से लोग यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं. चार धाम यात्रा शुरू होने के करीब छह हफ्ते बाद नैनीताल के कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस मनाए जाने का बड़ा आयोजन हो रहा है. ऐसी मान्यता है कि इस धाम में किस्मत बदलने वाले बाबा नीब किरौरी महाराज के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

ज़करबर्ग और जॉब्स की किस्मत यहीं बदली
दरअसल इस कैंची धाम की लोकप्रियता तबसे बढ़ने लगी, जब फेसबुक कंपनी के सह संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि इस मन्दिर से उन्हें प्रेरणा मिली. इतना ही नहीं, इस मन्दिर से एप्पल के संस्थापक स्टीब जॉब्स भी अपनी तकदीर बनाने की बात कह चुके हैं. यहां हर साल देश भर के भक्तों का तांता तो लगता ही है मगर विदेशी श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का विशेष केंद्र है.

विदेशी भक्तों के आध्यात्मिक गुरु रामदास ने भी इसी मन्दिर में आकर मत्था टेका था. इस धाम की मान्यता इतनी है कि बाबा नीब किरौरी के दर्शनों के लिए यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु कहते हैं कि यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता. बाबा के चमत्कारों से जुड़े कई किस्से श्रद्धालु यहां सुनाते हैं. इस मंन्दिर की स्थापना की कहानी भी काफी रोचक है.

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कैसे बना था कैंची धाम?
कहा जाता है कि कैंची के धर्मानन्द तिवाड़ी नैनीताल से घर लौट रहे थे, तब रास्ते में उनको भूत का डर सताने लगा. रास्ते में बाबा कम्बल ओढ़े मिले और उन्होंने उन्हें ढांढ़स बंधाया. जब धर्मानन्द ने पूछा कि बाबा अब कब दर्शन होंगे, तो बाबा 20 साल बाद कहकर ओझल हो गए. जब बाबा 20 साल बाद रानीखेत से लौट रहे थे, तब तिवाड़ी परिवार ने बाबा नीब करौरी को नहीं पहचाना. बाबा ने 20 साल पूरानी याद दिलाई और यहां मंदिर बनवाने की बात कही. तबसे हर साल यहां 15 जून को बाबा नीब किरौरी धाम का स्थापना दिवस मनाया जाता है.

11 सितंबर को बाबा ने ली महासमाधि

बाबा के चमत्कार, उनसे जुडी कथाएं और भक्तों की फेहरिश्त सात समुदंर पार तक हैं। बाबा ने महासमाधि के लिए वृंदावन को चुना। नौ सितंबर 1973 को नीम करौली महाराज ने कैंची से आगरा के लिए प्रस्थान किया। यह उनकी कैंची की अंतिम यात्रा थी। वह इसका संकेत भी दे गए। 10 सितंबर को आगरा से वृंदावन रवाना हुए, जहां 11 सितंबर को महासमाधि ली।

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