क्या आप जानते हैं दुनिया के सबसे कम उम्र के सीरियल किलर को, सिर्फ बिस्कुट के लालच में कबूले जुर्म

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दुनिया में तो वैसे तो कई अपराधी हुए जिनके कारनामों ने सभी को सन्न कर दिया। लेकिन जब बिहार के एक कातिल की कहानी सबके सामने आई तो विश्व भर में चर्चा हुई। इस कातिल का सुर्ख़ियों में आना इसलिए भी लाजमी था क्योंकि उसकी उम्र केवल 8 साल की थी।

बिहार में पैदा हुए दुनिया के सबसे कम उम्र के सीरियल किलर का नाम अमरजीत सदा था। इस किलर ने सिलसिलेवार ढंग से तीन लोगों का कत्ल किया, जिनमें एक उसकी छोटी बहन भी थी।

बिहार के बेगूसराय के मुशहरी गांव में साल 1998 में जन्में अमरजीत सदा के पिता पेशे से मजदूर थे। अमरजीत सदा का हाव-भाव बच्चों की तरह ही था, लेकिन साल 2007 में पुलिस ने जब उसे एक बच्ची की हत्या के जुर्म में हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सभी के होश उड़ गए। पुलिस की पूछताछ में उसने ऐसे ही सब कुछ नहीं बताया। अमरजीत सदा ने पूछताछ कर रहे पुलिसवालों से मुस्कुराते हुए कहा कि “पहले बिस्किट खिलाओगे तब बताऊंगा।”

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फिर पूछताछ के लिए पुलिसवालों को भी बच्चों जैसे हाव-भाव में उससे बात करनी पड़ी। पूछताछ में घुल-मिल जाने के बाद अमरजीत ने बताया कि उसने अब तक तीन छोटे बच्चों का कत्ल किया है। फिर एक और चौंकाने वाली बात सामने यह आई कि उसने अपनी छोटी बहन को भी मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि, इसके पीछे गलती अमरजीत के माता-पिता की भी थी; जिन्होंने जान-बूझकर उसके इस जुर्म को छिपा लिया था।

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पुलिस पूछताछ में अमरजीत ने बताया उसने अपने पड़ोस में रहने वाली एक 6 माह की बच्ची को भी मार डाला था। अमरजीत के मुताबिक, वह पहले बच्ची को एक सूनसान जगह पर लेकर गया और फिर एक पत्थर से उसका सिर कुचल दिया। इसी हत्या के मामले में अमरजीत को पुलिस ने हिरासत में लिया था। क्योंकि बच्ची के माता-पिता ने उसी पर शक जताया था। पुलिस को इस छोटे सीरियल किलर ने बताया कि उसे इस काम में मजा आता था, इसलिए ऐसा किया।

इस बात को लेकर अमरजीत के परिजनों ने उस वक्त दावा किया कि उसकी उम्र कम है और उसे सही-गलत का अंदाजा नहीं है। हालांकि, पुलिस ने मनो-चिकित्सकों की मदद ली तो पता चला कि अमरजीत कंडक्ट डिसऑर्डर से जूझ रहा था। इस डिसऑर्डर के चलते इंसान दूसरों को चोट पहुंचाने और मारने में खुशी महसूस करता है। इस घटना के बाद उसे मुंगेर के बाल सुधार गृह में भेज दिया गया था, क्योंकि नाबालिग होने के चलते उसे सजा नहीं सुनाई जा सकती थी।