थाने में जमा है खोपड़ी, पोते के अंतिम संस्कार और न्याय के लिए भटक रहे दादा; PM से भी लगा चुके गुहार
सिस्टम की अनदेखी या लेटलतीफी की वजह से न्याय की आस में भटकते कई लोगों की कहानी आपने सुनी होगी। लेकिन हम जिस शख्स के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो न्याय की आस में ना सिर्फ थाने के चक्कर काटते-काटते परेशान हैं बल्कि वो अपने घर के मृत सदस्य का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हैं।

अंतिम संस्कार ना कर पाने की वजह भी बड़ी हैरान करने वाली है। दरअसल हम बात कर रहे हैं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के एक बुजुर्ग की जिनका नाम औंकारलाल चारण है। औंकारलाल अपने मृत पोते का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं जिसकी खोपड़ी थाने में जमा है। कनेरा थाने के मालखाने में औंकारलाल के पोते योगेश चारण की खोपड़ी साल 2018 से ही मालखाने में जमा है लेकिन अब तक उनके शरीर का बाकी हिस्से का पता नहीं चल सका है।
लापता हुए फिर मिली लाश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगेश चारण साल 2016 में लापता हो गये थे। उस वक्त घरवालों ने बड़ी मिन्नते की थीं तब जाकर पुलिस ने गुमशुदगी का केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के करीब 2 साल बाद एक खेत से खोपड़ी बरामद की गई थी। यह खेत उन लोगों की बताई जाती है जिनकी औंकारलाल के परिवार से पुरानी अदावत है।
DNA टेस्ट किया गया
योगेश के घरवालों ने उस वक्त दावा किया था कि योगेश की हत्या की गई है और यह खोपड़ी उसी की है। करीब 3 महीने तक डीएनए जांच के लिए भाग-दौड़ करने के बाद परिजनों को इसकी इजाजत मिली थी। 3 बार डीएनए सैंपल फेल होने के बाद चौथी बार खोपड़ी का डीएनए टेस्ट किया गया। योगेश के माता-पिता से उनका डीएनए मैच हो गया। इसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
लेकिन अभी तक योगेंद्र के शरीर का बाकी हिस्सा नहीं मिल सका है। पोते के हत्यारों को सजा दिलवाने और उसका अंतिम संस्कार करने के लिए बुजुर्ग औंकारलाल ने शासन-प्रशासन के आगे कई बार अपनी गुहार लगाई है। इतना ही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी फरियाद पहुंचाई है। अब बुजुर्ग ने जिला कलेक्टर से मिलकर पोते की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

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