पिथौरागढ़ : काली नदी के किनारे सुरक्षा दीवार बना रहे भारतीय श्रमिकों पर नेपाल से पत्थर फेंके गए

खबर शेयर करें -

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच काली नदी के किनारे एक सुरक्षा दीवार का निर्माण कर रहे भारतीय श्रमिकों पर सीमा पार से पथराव किया गया, जिसके बाद पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने इस मुद्दे को नेपाली प्राधिकारियों के समक्ष उठाया. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

जिला मजिस्ट्रेट रीना जोशी ने बताया कि यह घटना सोमवार (19 दिसंबर) को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में हुई. उन्होंने बताया कि पथराव करने वालों ने नारेबाजी भी की.

जोशी ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बारे में नेपाली प्राधिकारियों से बात की है और उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

सीमा पार से भारतीय कामगारों पर पथराव की यह दूसरी घटना थी. इससे पहले ऐसी एक कथित घटना चार दिसंबर को हुई थी.

घटखोला इलाके में दीवार निर्माण का काम कर रहे भारतीयों पर नेपाल के कुछ ‘बदमाशों’ ने चार दिसंबर को पत्थर फेंके थे. इससे दोनों देशों के लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया था और भारतीय व्यापारियों ने लगभग दो घंटे तक नेपाल के साथ लगती सीमा पर पुल को अवरुद्ध कर दिया था.

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में प्रेमी की खुदकुशी के बाद 16 वर्षीय प्रेमिका ने लगाया फंदा: पीलीभीत के राजमिस्त्री की मौत के सदमे में उठाया खौफनाक कदम

घटखोला में 2013 में आई भीषण बाढ़ के बाद काली नदी के तट पर सुरक्षा दीवार बनाने की आवश्यकता पड़ी.

स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे (हमलावर) चार दिसंबर को भारतीय कामगारों पर पथराव करने वाले नेपाली ‘बदमाशों’ के खिलाफ भारत में दर्ज मामले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि पथराव करने वाले लोग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट) के विप्लव गुट से जुड़े हुए हैं और उनकी मंशा नदी किनारे निर्माण कार्य को बाधित करना है.

अधिकारियों ने पहले बताया था कि नेपाली प्राधिकारी शुरू में इस आशंका के कारण सुरक्षा दीवार के निर्माण का विरोध कर रहे थे कि यह नदी के प्रवाह को नेपाल की ओर मोड़ देगा, जिससे वहां बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छात्रों का उग्र प्रदर्शन: परीक्षा और रिजल्ट की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े BAMS छात्र, परिसर में मचा हड़कंप

भारतीय प्राधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतने का नेपाल को आश्वासन दिया कि उसके हितों को नुकसान न पहुंचे, जिसके बाद नेपाली प्राधिकारी निर्माण की अनुमति देने पर अंतत: राजी हो गए.

सिंचाई विभाग के एक इंजीनियर ने कहा, ‘हमने 985 मीटर की सुरक्षा दीवार में से 332 मीटर की दीवार का निर्माण पहले ही पूरा कर लिया है. यदि निर्माण शांतिपूर्वक जारी रहता है, तो हम अगले मानसून की शुरुआत से पहले शेष दीवार का निर्माण कर लेंगे.’

सीमा पर एक एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) अधिकारी ने बताया, ‘सोमवार की घटना बिप्लव के समर्थकों द्वारा निकाले गए एक जुलूस के दौरान हुई, जिसमें उन्होंने ‘लिंपियाधुरा, कालापानी, लिपुलेख हमारे हैं’ जैसे भारत विरोधी नारे लगाए.’

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार तेज: देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; बिजली चमकने और भूस्खलन की चेतावनी

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि राजनीतिक नेताओं का एक समूह है, जो अपने निहित स्वार्थों के लिए भारत के खिलाफ जनता को भड़का रहे हैं.’

अधिकारी ने यह भी दावा किया कि इन नेताओं को नेपाल पुलिस से किसी प्रकार का समर्थन प्राप्त है, जो जुलूस के दौरान मौजूद थे.

एसएसबी कमांडेंट (धारचुला) महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, ‘नेपाल में हमारे समकक्ष, सशस्त्र पुलिस बल से एक औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है. इस बार भारतीय पक्ष में काम करने वाला कोई भी मजदूर घायल नहीं हुआ.’

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad