यह है वह बागेश्वर की तीन वीरांगनाएं जिन्हें विधानसभा में नंदा देवी वीरता सम्मान से किया गया सम्मानित
वीरता और साहस के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाली उत्तराखंड की कई महिलाओं को विधानसभा में नंदा देवी वीरता सम्मान प्रदान किया गया।
बीते मंगलवार को प्रकाश पंत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने महिलाओं को सम्मानित किया। श्रीनंदा देवी राजजात पूर्व पीठिका समिति की ओर से हर साल अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। इस बार पर्वतीय क्षेत्र के दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत महिला को सम्मान दिया जा रहा है।

बागेश्वर की वीरांगनाएं और उनका काम
वीरांगना अनिता टम्टा : गंगनाथ स्वयं सहायता समूह के माध्यम से (देवलधार) की वीरांगना अनिता टम्टा ने कोरोना काल में मास्क बनाकर, इंदिरा अम्मा भोजनालय संचालित करने सहित हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में कार्य कर क्षेत्र की कई महिलाओं को स्वरोजगार के साथ जोड़ा। सेनेटरी पेड बनाकर भी युवतियों और महिलाओं को सस्ते दाम में उपलब्ध कराए।
वीरांगना आशा खेतवाल : अनर्सा गांव की रहने वाली वीरांगना आशा खेतवाल ने सैकड़ों स्वयं सहायता समूह एवं ग्राम संगठन बना कर क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्वरोजगार पैदा किया। महिला समूह बनाकर उनके हाथों को मजबूत कर रही हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी हुई है।
तारा टाकुली : कपकोट तहसील के लाेहारखेत, मुनार निवासी तारा टाकुली ने विभिन्न समाज सेवा के कार्यों से महिलाओं को जागरूक करने की दिशा में कार्य किया। वह पर्वतीय बिस्कुट भी बनाती हैं। मडुवे के बिस्कुट बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में उनका जिक्र किया था।
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