यूपी में 70% सीटों पर हुई वोटिंग: भाजपा को लेकर समझ में आ रहे 6 ट्रेंड
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 403 में से 292 सीटों पर मतदान हो चुका है.
बड़े पैमाने पर ऐसे छह पैटर्न हैं जो समझ में आ रहे हैं।
बीजेपी के समर्थन में गिरावट होने के बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति सीधा गुस्सा नहीं है. जमीनी स्तर की रिपोर्ट्स से तो लगता है कि पीएम की लोकप्रियता अब भी जबरदस्त है.
एक बात यह है कि संभव है, रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष कुछ हद तक बीजेपी को फायदा पहुंचाए. इसकी एक वजह यह है कि पीएम के लिए यह माना जाता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफल रहे हैं.
वोटर्स अक्सर यह कहते सुने जाते हैं कि उन्हें लगता है, मोदी ने विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया है. अब यह सही है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन यूपी में यह आम धारणा है.

जो गुस्सा है, वह विधायक स्तर पर है. अयोध्या जैसी सीट पर भी, जहां निर्माणाधीन राम मंदिर की वजह से बीजेपी के अच्छा करने की उम्मीद है, वहां भी हवा विधायक के खिलाफ है.
बीजेपी की हालत और खस्ता होने की वजह यह भी है कि स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और कई विधायकों, विशेष रूप से ओबीसी पृष्ठभूमि वाले, पार्टी को अलविदा कह गए हैं. इसकी वजह से बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की पार्टी की योजनाओं पर पानी फिर गया.
इससे स्थानीय विधायक के खिलाफ नाराजगी के चलते बीजेपी को सीटों का नुकसान होने का खतरा बना हुआ है.
इस तरह पीएम की लोकप्रियता और विधायकों की अलोकप्रियता के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ झूल रहे हैं.
इसमें कोई शक नहीं कि आदित्यनाथ को भारी समर्थन मिल रहा है. मतदाताओं के एक वर्ग के बीच यह धारणा है कि आदित्यनाथ के तहत कानून और व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ‘सुधार’ उतना स्पष्ट साफ नहीं दिखता, जितना कि बीजेपी दावा करती है.
लेकिन आदित्यनाथ की शोहरत का वह आलम नहीं जो उन्हें पीएम के नजदीक खड़ा करे और ऐसे बहुत से वोटर्स हैं जो खुलकर उन्हें खिलाफ नाखुशी जाहिर करते हैं.

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