हल्द्वानी: गांधीनगर में दो माह से दूषित पेयजल सप्लाई, मासूम बीमार; लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर

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हल्द्वानी (नैनीताल): कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी के गांधीनगर क्षेत्र में पीने के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नलों को खोलने पर सीधे गंदगी घरों के अंदर पहुँच रही है। यह समस्या करीब दो महीने से बनी हुई है, जिससे लोग निराशा और स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं।

⚠️ दूषित पानी से बिगड़ी सेहत

  • बीमारी: विमला देवी नामक महिला ने बताया कि उनके परिवार की 14 महीने की बच्ची राधिका की तबीयत गंदे पानी की वजह से ही बिगड़ी है। डॉक्टर की सलाह के बाद अब परिवार बोतलबंद या उबला पानी ही पीने को देता है।

  • विकल्प: आर्थिक रूप से कमजोर कई लोग बाजार से बोतलबंद पानी नहीं खरीद पा रहे हैं, इसलिए उन्हें मजबूरी में नजदीकी नलकूप से पीने का पानी भरकर लाना पड़ रहा है (निर्मला)।

  • सुरक्षा उपाय: कई बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि वे फिटकरी-नमक मिलाकर पानी को चूल्हे में उबालने के बाद ही पीने लायक बनाती हैं, क्योंकि लापरवाही बरतने पर बीमार होने का डर है।

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🗣️ स्थानीय लोगों की पीड़ा

गांधीनगर के निवासियों ने अपनी परेशानी साझा की:

  • विमला देवी: “नलों से आना वाले पानी बिलकुल भी पीने लायक नहीं है। करीब दो महीने से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।”

  • मंजू: “दीपावली के बाद से गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सुबह-शाम दोनों समय यही हाल है।”

  • प्रद्युम्न: “पीने के लिए दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। साफ पानी अधिकार है। व्यवस्था करनी चाहिए।”

  • संजय सोनकर: “बड़ी आबादी से जुड़े इस इलाके में गंदे पानी की समस्या से हर कोई परेशान हो चुका है। लाइन चेक कर दिक्कत दूर होनी चाहिए।”

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🚧 जल संस्थान का बयान और विरोधाभास

  • पार्षद का दावा: पार्षद रोहित कुमार ने बताया कि शिकायत के बाद जल संस्थान की टीम आई थी, लेकिन चेक करने पर कहीं कोई पेयजल लाइन टूटी नहीं मिली थी, मगर पानी अब भी खराब ही आ रहा है।

  • अधिकारी का बयान: ईई जल संस्थान आरएस लोशाली ने कहा कि हाल में गांधीनगर क्षेत्र से गंदे पानी से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली। उन्होंने अब मामला संज्ञान में आने पर जल संस्थान की टीम को मौके पर भेजने की बात कही।

  • विभाग का बचाव: जेई भुवन भट्ट का कहना था कि करीब 25 दिन पूर्व लाइनों की सफाई (लाइन वाश) की गई थी, जब सिल्ट पहुंचने की शिकायत मिली थी।

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