हल्द्वानी : सरकारी भूमि की बंदरबांट का आरोप, खुर्द बुर्द की 55 बीघा सरकारी जमीन
हल्द्वानीः नैनीताल जिले के हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में सरकार को दी गई जमीन को भू माफियाओं की ओर से खुर्द बुर्द करने का मामला सामने आया है. जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है. पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से हुआ है. मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने डीएम को एक शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है. वहीं, जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने शिकायती पत्र को गंभीरता लिया है और जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी है.
ये है पूरा मामला: दरअसल, हल्द्वानी के आरटीआई कार्यकर्ता रविशंकर जोशी ने नैनीताल डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल को एक शिकायती पत्र सौंपा है. जिसमें उन्होंने बताया है कि गौलापार कुंवरपुर के पास 55 बीघा जमीन को साल 2010 में राजनेताओं और बड़े कारोबारियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर खुर्द बुर्द का किया है. जिसमें सारे सरकारी नियमों को ताक में रख सीलिंग एक्ट का उल्लंघन किया गया है. उनका आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लगवाने के लिए भू माफिया के साथ साठगांठ की और सरकारी भूमि की बंदरबांट की.

55 बीघा सरकारी जमीन खुर्द बुर्द: रविशंकर जोशी ने तत्कालीन समय के अधिकारियों और भू माफिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि कैसे 55 बीघा जमीन एक व्यक्ति ने अनजान व्यक्ति को दान में दे दी और उसी अनजान व्यक्ति ने 1 महीने बाद 7 लोगों के नाम पर पूरी जमीन रजिस्ट्री करा दी. इस पूरे मामले में तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत बताई गई है. इस जमीन को विनियमितीकरण करने में भी बड़ा खेल हुआ है. 55 बीघा जमीन में विनियमितीकरण के लिए सरकार को एक पैसे का भी राजस्व नहीं मिला.
आवेदनकर्ता ने ₹10 के स्टांप में यह लिख कर दिया है कि उन्होंने शुल्क जमा कर दिया है और तत्कालीन अधिकारियों ने यह जांचने की भी जहमत नहीं उठाई कि शुल्क जमा हुआ है या नहीं. उसी के आधार पर जमीन का विनियमितीकरण करने की कार्रवाई की गई. आरटीआई कार्यकर्ता रविशंकर ने बताया कि जिन सात लोगों के नाम रजिस्ट्री करवाई गई है, वो सब रसूखदार हैं या फिर उनके परिवार के लोग हैं. नेता भू माफियाओं से गठजोड़ करके सरकार के राजस्व को करोड़ों का चूना लगा चुके हैं. फिलहाल, अब जिलाधिकारी ने जांच बैठा दी है.
तीस सदस्यीय जांच टीम गठितः वहीं, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने शिकायती पत्र को गंभीरता से लिया है और जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी है. जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (प्र) और उपजिलाधिकारी को नामित किया गया है. उन्होंने गठित समिति के सदस्यों को 10 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
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