पेट की आग’ और ‘बारिश की एक बूंद’ के बाद विनोद भगत के ‘दरकते सपने’ ने मचाई साहित्यिक धूम, गणतंत्र दिवस पर तीसरी कृति का भव्य विमोचन

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राजू अनेजा,काशीपुर। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भगत ने अपनी तीसरी पुस्तक—कहानी संग्रह ‘दरकते सपने’ के साथ एक बार फिर साहित्य जगत में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे पहले प्रकाशित उनकी चर्चित कृतियां ‘पेट की आग’ और ‘बारिश की एक बूंद’ पाठकों के बीच खास पहचान बना चुकी हैं, और अब ‘दरकते सपने’ ने भी साहित्य प्रेमियों में खासा उत्साह पैदा कर दिया है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में पुस्तक का विधिवत विमोचन नगर के महापौर दीपक बाली, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती चंद्रप्रभा तथा मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कहानी संग्रह ‘दरकते सपने’ में कुल 26 कहानियां शामिल हैं, जो समकालीन समाज के यथार्थ, आमजन के संघर्ष, टूटते सपनों, सामाजिक असमानताओं और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उकेरती हैं। विनोद भगत ने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज के उन पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया है, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती, लेकिन जो आम आदमी के जीवन की असल सच्चाई हैं।
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है और विनोद भगत की यह कृति सामाजिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करेगी। ब्लॉक प्रमुख श्रीमती चंद्रप्रभा ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक प्रयास नई पीढ़ी को सोचने और संवेदनशील बनने की प्रेरणा देते हैं। वहीं मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट ने लेखक को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ा साहित्य आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यप्रेमियों और पत्रकारों ने लेखक को उनकी तीसरी पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई दी। उपस्थित वक्ताओं का कहना था कि ‘दरकते सपने’ केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपे दर्द, संघर्ष और उम्मीदों का जीवंत दस्तावेज है, जो पाठकों को आत्ममंथन के लिए विवश करता है।
उल्लेखनीय है कि विनोद भगत की पूर्व प्रकाशित कृतियां ‘पेट की आग’ और ‘बारिश की एक बूंद’ पहले ही पाठकों के दिलों में अपनी जगह बना चुकी हैं। अब ‘दरकते सपने’ के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे केवल कथाकार नहीं, बल्कि समाज के सजग दस्तावेज़कार भी हैं। निश्चित रूप से यह कृति हिंदी कहानी जगत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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