12 साल के मासूम ने की आत्महत्या; घर में अकेला था छात्र, जांच में जुटी पुलिस

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पिथौरागढ़ से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां महज 12 वर्ष के एक बच्चे ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इतनी कम उम्र में इस तरह की घटना ने मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों पर बढ़ते दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

यहाँ घटना का पूरा विवरण और वर्तमान स्थिति दी गई है:

पिथौरागढ़: जिला मुख्यालय के एक मोहल्ले में अपनी बुआ के पास रहकर पढ़ाई करने वाले 12 वर्षीय छात्र का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना के समय बच्चा घर पर अकेला था। पुलिस और फोरेंसिक टीम मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है।

🕒 घटनाक्रम: 30 जनवरी का वाकया

  • सुबह 10:00 बजे: बच्चे की बुआ अपने दो बच्चों के साथ किसी काम से बाहर गईं। स्कूल की छुट्टी होने के कारण बच्चा घर पर अकेला था।

  • शाम 04:00 बजे: जब बुआ वापस लौटीं, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक कोई जवाब न मिलने पर जालीदार दरवाजे की कुंडी तोड़ी गई।

  • खौफनाक मंजर: कमरे के अंदर बच्चे का शव लटका हुआ था। मौके के हालात बताते हैं कि उसने पहले टेबल रखा और फिर उसके ऊपर कुर्सी रखकर यह कदम उठाया।

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📋 पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • माता-पिता: बच्चे के पिता दिल्ली में एक निजी नौकरी करते हैं, जबकि मां गांव (पिथौरागढ़ से 15 किमी दूर) में रहती हैं।

  • बचपन से बुआ के पास: बच्चा अपनी पढ़ाई के लिए बचपन से ही सीमांत मुख्यालय में अपनी बुआ के घर रह रहा था। बुआ के पति सेना में कार्यरत हैं।

  • छुट्टियों से वापसी: बताया जा रहा है कि बच्चा अभी तीन दिन पहले ही अपने गांव से वापस लौटा था।

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👮 पुलिस की कार्रवाई और जांच के बिंदु

पिथौरागढ़ कोतवाल ललित मोहन जोशी के अनुसार, पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है:

  1. पोस्टमार्टम: शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मृत्यु के सही समय और कारणों का पता चल सके।

  2. कारणों की तलाश: पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्चा किसी मानसिक तनाव, पढ़ाई के दबाव या घर से दूर रहने की उदासी (Homesickness) से जूझ रहा था।

  3. डिजिटल जांच: यदि बच्चा मोबाइल या इंटरनेट का उपयोग करता था, तो उसके ब्राउजिंग इतिहास की भी जांच की जा सकती है।

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💡 एक गंभीर सामाजिक चिंता

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी छोटी उम्र में इस तरह के कदम उठाने के पीछे कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • अकेलेपन का अहसास।

  • माता-पिता से दूर रहने की टीस।

  • सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग का प्रभाव।

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