भगवान के घर में भी सौदेबाज़ी! अस्पताल की चौखट पर तड़पता रहा सड़क हादसे में घायल, जेब में पैसे न देख निजी अस्पताल ने मोड़ा मुंह

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राजू अनेजा,रूद्रपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह जनपद में  निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया। घटना रुद्रपुर की है जहां सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल साइकिल सवार को इलाज के लिए जब नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया गया, तो वहां प्राथमिक उपचार शुरू करने के बजाय पैसों और मौत की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए गए। यह रवैया न केवल कानून की खुली अवहेलना है, बल्कि इंसानियत पर भी करारा तमाचा।
प्रत्यक्षदर्शी भदोहीपुरा निवासी आकाश यादव के अनुसार, रविवार शाम भदोहीपुरा मोड़ पर तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि घायल सड़क पर गिर पड़ा और अत्यधिक खून बहने लगा। हालत नाजुक देख आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए घायल को मात्र 100 मीटर दूर स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां का मंजर सबको सन्न कर गया।
राहगीरों का आरोप है कि घायल दर्द से कराहता रहा, खून बहता रहा, मगर अस्पताल प्रशासन ने प्राथमिक उपचार तक देने से इनकार कर दिया। समय की नजाकत समझते हुए लोग बहस में उलझने के बजाय घायल को तुरंत जिला अस्पताल रुद्रपुर ले गए, जहां उसका उपचार शुरू हुआ।
यह घटना सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और मोटर वाहन अधिनियम पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनमें कहा गया है कि आपात स्थिति में किसी भी अस्पताल को घायल का प्राथमिक इलाज करने से मना करने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद निजी अस्पताल खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आए।
स्थानीय लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि जिला अस्पताल पहुंचाने में थोड़ी और देर हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या निजी अस्पताल अब सिर्फ मुनाफे की मशीन बनकर रह गए हैं?
इस संबंध में सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर घायल के इलाज से कोई निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। फिलहाल कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सवाल वही है—
क्या इलाज से पहले इंसान की जेब देखी जाएगी, या उसकी जान?

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