उत्तराखंड में चुनाव से पहले धामी सरकार ने खोला दायित्वों का पिटारा: लगातार तीसरे दिन छह नेताओं को सौंपी कमान, दायित्वधारियों की संख्या 100 के पार

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देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सांगठनिक और सामाजिक संतुलन साधने के लिए राजनीतिक नियुक्तियों की रफ्तार तेज कर दी है। शासन स्तर से शुक्रवार शाम को दायित्वधारियों की लगातार तीसरी सूची जारी की गई, जिसमें विभिन्न आयोगों, बोर्डों और सलाहकार समितियों में छह वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष पद की अहम विधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पिछले तीन दिनों में चरणबद्ध तरीके से जारी इस तीसरी सूची के बाद राज्य में कुल दायित्वधारियों की संख्या अब 100 के आंकड़े को पार कर चुकी है।

इन छह नेताओं को मिली विभिन्न आयोगों और बोर्डों में विधिक जिम्मेदारी

शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, संगठन के प्रति समर्पित और अनुभवी चेहरों को चुनावी वर्ष में विभिन्न विभागों की समितियों में उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया है:

  1. ओमवीर सिंह राघव (देहरादून): उपाध्यक्ष, गन्ना विकास सलाहकार समिति।

  2. धीरेंद्र पंवार (देहरादून): उपाध्यक्ष, मीडिया सलाहकार समिति।

  3. भूपेंद्र कंडारी (देहरादून): उपाध्यक्ष, गौ सेवा आयोग।

  4. लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रघुवीर सिंह भंडारी: उपाध्यक्ष, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति।

  5. रणजीत सिंह नामधारी (उधम सिंह नगर): उपाध्यक्ष, पशु कल्याण बोर्ड।

  6. किरन (चंपावत): उपाध्यक्ष, सीमांत क्षेत्र कार्यक्रम अनुश्रवण परिषद।

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चुनावी वर्ष में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की बड़ी कवायद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक और सामाजिक विविधता वाले राज्य में ये नियुक्तियां केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की विधिक कोशिश की जा रही है।

  • जिलों को प्रतिनिधित्व: ताजा सूची में देहरादून, उधम सिंह नगर और चंपावत जैसे मैदानी, पर्वतीय और सीमांत जिलों को विशेष विधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है।

  • असंतोष दूर करने की रणनीति: लंबे समय से पार्टी के लिए धरातल पर काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं, पूर्व पदाधिकारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों को इन पदों पर बिठाकर चुनावी वर्ष में असंतोष को शांत करने की रणनीति अपनाई गई है।

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विभागीय योजनाओं की निगरानी और सीमांत क्षेत्रों पर विशेष फोकस

धामी सरकार का मुख्य फोकस इन नियुक्तियों के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करना है। सीमांत क्षेत्र कार्यक्रम अनुश्रवण परिषद में चंपावत की किरन को उपाध्यक्ष बनाकर सरकार ने सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास की अपनी विधिक प्रतिबद्धता का संदेश दिया है।

सरकार का मानना है कि गन्ना विकास, मीडिया, गौ सेवा, पशु कल्याण और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दायित्वधारियों की सक्रियता से विभागीय योजनाओं की मॉनिटरिंग (निगरानी) अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी। ये समितियां सीधे धरातल की समस्याओं को समझकर सरकार को विधिक सुझाव प्रेषित करेंगी।

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आने वाले दिनों में जारी हो सकती हैं कुछ और सूचियां

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा संगठन की ओर से समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और आयोगों और निगमों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए अगली विधिक सूचियां भी जारी की जा सकती हैं। फिलहाल, इन छह नियुक्तियों से जहां संबंधित नेताओं के समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं पूरे प्रदेश में चुनावी हलचलें और तेज हो गई हैं।