क्या 5 जनवरी को राजनीति से संन्यास की घोषणा कर सकते हैं हरीश रावत, उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में हलचल
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अपनी ही पार्टी के प्रति नाराजगी जाहिर करने के बाद कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. जबकि हरीश रावत के यह बगावती तेवर अचानक नहीं हुए हैं, हरीश रावत लंबे समय से कई पहलुओं पर नजर बनाए हुए थे.

वहीं एक धड़े को लग रहा है कि आने वाले चुनाव में कहीं हरीश रावत दोबारा मुख्यमंत्री न बन जाए, इसलिए समय-समय पर मुखालफत और साइडलाइन करने के बयान कोई नए नहीं हैं. वहीं राहुल गांधी के देहरादून रैली के दौरान मंच के संचालन को लेकर भी नाराजगी की एक वजह बताई जा रहा है. वहीं बीते दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी की देहरादून रैली में हरीश रावत के समर्थन में नारे लगने तो पार्टी के सहप्रभारी को खुद मंच से किसी भी पार्टी नेता की व्यक्तिगत नारेबाजी न करने की बात कहनी पड़ी.
दरअसल, मंच पर हरीश रावत के करीबी राजीव जैन जनसभा का संचालन करते हुए दिखाई दे रहे थे. इस दौरान उन्होंने मंच से हरीश रावत की बड़े ही जोश के साथ नारेबाजी की. हालांकि इसके बाद उन्होंने बाकी नेताओं के नाम भी लिए, लेकिन इसके बाद फौरन पार्टी के सह प्रभारी ने मंच संभाला और किसी को भी किसी नेता के व्यक्तिगत नारेबाजी करने से बचने की बात कही. बड़ी बात ये है कि इसके बाद हरीश रावत के करीबी राजीव जैन मंच के संचालन से दूर हो गए और सह प्रभारी राजेश धर्माणी ने मंच संभाल लिया.वहीं मंच पर पार्टी की एकजुटता दिखाने के लिए करीब 60 कुर्सियां लगाई गई थी, ताकि पार्टी के सभी नेताओं को मंच पर जगह मिल सके और एकजुटता का संदेश दिया जा सके. उधर हरीश रावत और प्रीतम सिंह मंच पर एक साथ दिखाई दिए थे.
रैली के दौरान राजीव जैन मंच से किनारे हो गए हरीश रावत और उनके खेमे को यह बात बुरी लगी. हालांकि बताया जाता है कि यह पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले भी कई चुनावी सभाओं और चुनावी कार्यक्रमों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
बीते दिनों पिथौरागढ़ की जनसभा में जिस तरह से कांग्रेस के प्रति अपार जनसमूह उमड़ा, उसके बाद हरीश रावत कुमाऊं में अपनी दमखम दिखाने के लिए तैयार थे. उत्तराखंड कांग्रेस के प्रभारी देवेंद्र यादव ने उस जनसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को भी मंच पर बैठाने और स्वागत करवाने की भरपूर कोशिश की. वहीं यह दिखाने की कोशिश की प्रीतम सिंह ही बड़े नेता हैं. हरीश रावत को यह मालूम नहीं था कि प्रीतम सिंह को भी मंच पर जगह दी जा रही है. लेकिन अचानक से कुछ नेताओं की कुर्सी लगने के बाद यह मामला साफ हो गया कि दिल्ली से ही देवेंद्र यादव को कुछ अतिरिक्त करने की सलाह दी जा रही है. बाकी रही सही कसर अविनाश पांडे के उत्तराखंड में एंट्री ने कर दी है.
अविनाश पांडे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी चुनने के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा था. इस बार भी हरीश रावत को बिना बताए ऐसी जानकारी है कि अविनाश पांडे को देहरादून भेज दिया गया. अविनाश पांडे देहरादून हरिद्वार उधमसिंह नगर और तमाम जगहों पर प्रत्याशियों के बायोडाटा इकट्ठा कर रहे हैं और उसके आधार पर ही नेताओं के टिकट फाइनल होंगे. हरीश रावत को यह लगता है कि पार्टी आलाकमान देवेंद्र यादव को ज्यादा तवज्जो दे रहा है. इसी वजह से हरीश रावत का यह गुस्सा फूटा. अविनाश पांडे राजस्थान में भी टिकटों के बंटवारे में अहम भूमिका निभा चुके हैं.
इन सभी हालातों को देखते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया, वह बेहद तेजी से वायरल हुआ. लेकिन जानकार यह भी मानते हैं कि हरीश रावत कांग्रेस में फिलहाल दबाव बनाने के लिए यह सब कर रहे हैं. जबकि कांग्रेस ना तो उन्हें छोड़ेगी और ना ही वह कांग्रेस को, लेकिन वो अपने इस व्यथा से अपनों को ही साधने में जुटे हुए हैं. देखना होगा कि वो इसमें कितना कामयाब होते हैं.
हरीश रावत का पोस्ट-
चुनाव रूपी समुद्र है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है’. ‘जिस समुद्र में तैरना है, जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं. मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है’. चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है, ‘न दैन्यं न पलायनम. बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया साल शायद रास्ता दिखा दे. मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे. सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं, जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं. मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है’.
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