देवभूमि पार्टी के संस्थापक वीरेंद्र पुरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कुटिया में अचेत मिले; करंट लगने की आशंका

लालकुआं। उत्तराखंड देवभूमि पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष एवं ब्रह्मदेव मंदिर के संचालन से जुड़े वीरेंद्र पुरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से समूचे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। देर रात पुलिस को सूचना मिली कि वीआईपी गेट स्थित उनकी कुटिया का दरवाजा अंदर से बंद है और काफी आवाज देने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने दरवाजा तुड़वाकर भीतर प्रवेश किया, जहां वीरेंद्र पुरी महाराज अचेत अवस्था में पड़े मिले। मौके पर पास में हीटर और तवा पड़ा मिलने से प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि हीटर पर रोटी बनाते समय वह अचानक करंट की चपेट में आ गए। पुलिस ने फोरेंसिक जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी भिजवा दिया है, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
2002 में लड़ा था लालकुआं से चुनाव, 70 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कर रहे थे तैयारी; कार्यकर्ताओं में शोक
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन सिंह राणा ने बताया कि मामला प्रथम दृष्टया करंट लगने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। वीरेंद्र पुरी महाराज धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ उत्तराखंड की राजनीति में भी लंबे समय से सक्रिय थे। उन्होंने वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में लालकुआं सीट से चुनाव लड़कर तीसरा स्थान हासिल किया था और तब से लगातार चुनाव मैदान में डटे रहे। आगामी चुनाव को लेकर वह प्रदेश की सभी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुटे थे। उनके इस प्रकार अचानक असमय निधन से समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर व्याप्त है।
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