
राजू अनेजा,काशीपुर। महाभारतकालीन इतिहास और धार्मिक आस्था का प्रतीक द्रोणासागर तीर्थ इन दिनों अपनी पवित्रता पर उठ रहे सवालों को लेकर चर्चा में है। कभी ऋषि परंपरा और संस्कृति का प्रतीक रहा यह ऐतिहासिक तीर्थ अब कुछ असामाजिक तत्वों और प्रेमी जोड़ों की अशोभनीय गतिविधियों के कारण अपनी गरिमा खोता नजर आ रहा है। यहां सुबह और शाम स्वास्थ्य लाभ के लिए आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और परिवार इन हरकतों से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में द्रोणासागर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
सुबह-शाम उमड़ती है सैकड़ों लोगों की भीड़
द्रोणासागर तीर्थ शहर के सबसे शांत और हरियाली से भरपूर स्थानों में गिना जाता है। सुबह सूर्योदय से पहले ही यहां मॉर्निंग वॉक करने वालों की भीड़ जुटने लगती है। शाम के समय भी बड़ी संख्या में लोग सैर, योग और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए यह पसंदीदा स्थान माना जाता है, लेकिन अब यहां का माहौल पहले जैसा नहीं रह गया है।
पेड़ों की ओट में अशोभनीय हरकतें, परिवारों को लौटना पड़ रहा वापस
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दोपहर के समय ही नहीं, कई बार सुबह और शाम भी कुछ युवक-युवतियां पेड़ों की ओट में बैठकर अशोभनीय हरकतें करते दिखाई देते हैं। कई लोग सार्वजनिक स्थान की मर्यादा को ताक पर रखकर एक-दूसरे के आलिंगन में नजर आते हैं। ऐसे दृश्य देखकर परिवार और महिलाएं असहज महसूस करती हैं। कई लोग तो बिना रुके ही वापस लौट जाते हैं। लोगों का कहना है कि तीर्थ स्थल को प्रेम प्रदर्शन का अड्डा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
रील बनाने और हुड़दंग से बिगड़ रहा माहौल
द्रोणासागर में इन दिनों सोशल मीडिया के लिए रील बनाने वालों की भी भीड़ बढ़ गई है। कई युवक-युवतियां तेज आवाज में गाने बजाकर वीडियो शूट करते हैं, जिससे धार्मिक और शांत वातावरण प्रभावित होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थान मनोरंजन पार्क नहीं बल्कि आस्था और विरासत का केंद्र है, जहां अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
सीसीटीवी लगे, फिर भी नहीं थम रहीं गतिविधियां
हैरानी की बात यह है कि द्रोणासागर परिसर में सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके बावजूद अशोभनीय गतिविधियां लगातार जारी हैं। लोगों का सवाल है कि जब निगरानी की व्यवस्था मौजूद है तो नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती। कैमरों का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उनके आधार पर दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।
महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा गलत असर
मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाली महिलाओं का कहना है कि अब पहले जैसी सुरक्षा और सहजता महसूस नहीं होती। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के सामने इस तरह के दृश्य आने से उन पर गलत प्रभाव पड़ता है। धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर ऐसा माहौल किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
द्रोणाचार्य की तपोभूमि की पवित्रता बचाने की मांग
मान्यता है कि महाभारत काल में आचार्य द्रोणाचार्य ने इसी स्थान पर पांडवों और कौरवों को धनुर्विद्या का प्रशिक्षण दिया था। इसी कारण यह स्थल श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्तमान में यह पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है, लेकिन लोगों का कहना है कि केवल संरक्षण पर्याप्त नहीं, बल्कि इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और प्रभावी प्रबंधन भी जरूरी है।
प्रशासन से उठी सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों, मॉर्निंग वॉक करने वालों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन, पुलिस और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि द्रोणासागर परिसर में नियमित पुलिस गश्त कराई जाए, अशोभनीय हरकत करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर ऐसे लोगों के प्रवेश पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। लोगों का कहना है कि द्रोणासागर परिवारों, महिलाओं और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसे अय्याशी और अभद्रता का अड्डा बनने से हर हाल में बचाया जाना चाहिए।
एसपी बोले : बढ़ेगी पुलिस की चौकसी, सीसीटीवी फुटेज से होगी पहचान

एसपी ने कहा कि तीर्थ स्थल की गरिमा और वहां आने वाले परिवारों, महिलाओं एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए द्रोणासागर परिसर में नियमित पुलिस चौकसी कराई जाएगी। साथ ही परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर अशोभनीय हरकत करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान की जाएगी। उनकी पहचान होने के बाद उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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