बागेश्वर: जंगलों की आग से दमघोंटू हुआ वातावरण; आबादी की ओर भाग रहे वन्यजीव, वन विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
बागेश्वर (5 मार्च 2026): जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया है। धुएं की मोटी चादर ने न केवल पहाड़ों के सौंदर्य को ढका है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। विशेष रूप से कपकोट, धरमघर और अमसरकोट के जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य और वन्यजीवों पर दोहरा संकट
-
सांस के मरीजों को परेशानी: वातावरण में फैले भारी धुएं के कारण अस्थमा और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों का दम घुट रहा है। अस्पतालों में आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें बढ़ रही हैं।
-
आबादी की ओर वन्यजीव: आग और गर्मी से बचने के लिए जंगली जानवर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में गांवों और शहरों की ओर भाग रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का खतरा बढ़ गया है और ग्रामीणों में भारी दहशत है।
होली के दौरान भड़की आग: मानवीय चूक बनी कारण
वन विभाग के अनुसार, अधिकांश आग की घटनाएं सिविल भूमि से शुरू हो रही हैं।
-
लापरवाही: होली के दौरान और खेतों की सफाई के वक्त लोग कूड़ा-करकट व झाड़ियों को जला रहे हैं। यही आग हवा के साथ फैलकर मुख्य जंगलों तक पहुँच रही है।
-
शिखरकोट का मामला: चामी के पूर्व प्रधान महीप पांडे के अनुसार, शिखरकोट के जंगलों में दो दिनों तक आग धधकती रही, जिसे वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद काबू किया।
प्रशासन और वन विभाग का कड़ा रुख
उपप्रभागीय वनाधिकारी (SDO) तनुजा परिहार ने स्पष्ट किया है कि विभाग पूरी तरह सतर्क है:
-
सख्त कार्रवाई: जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वालों को चिह्नित किया जा रहा है और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-
राजस्व विभाग को निर्देश: चूंकि आग ज्यादातर सिविल भूमि से लग रही है, इसलिए जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग (पटवारियों) को अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
वनाग्नि संकट: मुख्य बिंदु (Snapshot)
| प्रभावित क्षेत्र | मुख्य समस्या | आग का प्रमुख कारण |
| अमसरकोट, कपकोट, धरमघर | भारी धुआं और पर्यावरण क्षति | झाड़ियों और कूड़ा जलाने से फैली आग |
| वन्यजीव | गांवों/शहरों की ओर पलायन | प्राकृतिक आवास का जलना |
| स्वास्थ्य | अस्थमा और आंखों में जलन | हवा में घुला जहरीला धुआं |
जनता से अपील
स्थानीय निवासियों ने आह्वान किया है कि जंगलों को बचाने के लिए केवल विभाग के भरोसे रहना काफी नहीं है। वन संपदा को बचाने के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक होना होगा और आग लगाने वालों की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी होगी।

अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

