19 गवाहों की गवाही भी नहीं दिला सकी सजा, हत्या के मुकदमे में बहू मानसी दोषमुक्त

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सास शकुंतला की हत्या के आरोप में चल रहा था मुकदमा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला

 

राजू अनेजा, काशीपुर। काशीपुर में सास की हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने आरोपी बहू को बड़ी राहत देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उदय प्रताप सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद मानसी को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। इस फैसले ने एक बार फिर आपराधिक मुकदमों में ठोस साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण की अहमियत सामने ला दी है।

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मामले के अनुसार, काशीपुर निवासी गौरव कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर अपनी पत्नी मानसी पर अपनी मां शकुंतला की हत्या करने का आरोप लगाया था। शिकायत में बताया गया था कि मां और पत्नी के बीच आपसी विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते पत्नी पर मां की हत्या करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की और जांच पूरी होने के बाद आरोपी मानसी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।

 

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मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 19 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों ने अदालत में अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के अंतिम चरण में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा।

 

पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमति जताई और आरोपी मानसी को हत्या के मामले में दोषमुक्त कर दिया।

 

अदालत के फैसले से आरोपी को बड़ी राहत

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लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से मानसी को बड़ी राहत मिली है। वहीं, यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि किसी पर गंभीर अपराध का आरोप लगना और अदालत में आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। न्यायालय का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी कसौटियों के आधार पर हुआ है।