उत्तराखंड में अवैध निर्माण पर सरकार का शिकंजा! घर-घर सर्वे, नोटिस के बाद सीलिंग और बुलडोजर की तैयारी

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आवासीय मकानों में नियम विरुद्ध चल रहे कारोबार से लेकर अवैध प्लॉटिंग तक होगी जांच; ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में भी चिन्हीकरण की प्रक्रिया तेज

 

 

राजू अनेजा,देहरादून/काशीपुर। उत्तराखंड में नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने वालों और आवासीय भवनों का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रदेश में अवैध निर्माण, अवैध प्लॉटिंग और रिहायशी इलाकों में नियमों के विरुद्ध संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया गया है। सर्वे, चिन्हीकरण, नोटिस, सीलिंग और नियमानुसार ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई की तैयारी है। यानी अब केवल अवैध निर्माण खड़ा कर लेने या आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने भर से कार्रवाई से बच पाना आसान नहीं होगा।

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण ने विकास प्राधिकरणों और संबंधित निकायों को कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दायरे में बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवन, नियमों के विपरीत निर्माण, अवैध प्लॉटिंग और आवासीय भवनों में बिना आवश्यक अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।

 

 

पहले सर्वे, फिर नोटिस; नियमों के उल्लंघन पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण

 

अभियान के तहत अधिसूचित विकास क्षेत्रों, कॉलोनियों और सोसाइटियों में सर्वे कर संबंधित निर्माणों और गतिविधियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों को नोटिस दिए जाएंगे। इसके बाद लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीलिंग तथा जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

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खास तौर पर उन भवनों की जांच की जाएगी, जिनका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है, लेकिन वहां दुकान, रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हालांकि, हर आवासीय भवन में कारोबार करना अपने आप में अवैध नहीं है; कार्रवाई संबंधित क्षेत्र के नियमों, स्वीकृत उपयोग और आवश्यक अनुमतियों के आधार पर होगी।

 

 

दून में 2200, हरिद्वार में 570 से अधिक नोटिस

 

अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देहरादून में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के मामलों में करीब 2200 नोटिस जारी किए हैं। वहीं, हरिद्वार में नक्शे के विपरीत निर्माण के मामलों में 570 से अधिक लोगों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

पौड़ी में 28 निर्माणों को सीलिंग के नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि पिथौरागढ़ में आवासीय मकानों में संचालित कोचिंग संस्थानों समेत पांच मामलों में नोटिस दिए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि अभियान केवल कागजी निर्देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई स्थानों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

 

 

नैनीताल से ऊधमसिंह नगर तक नजर, काशीपुर में भी अहम होंगे नतीजे

 

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नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर जिलों में भी निर्माणों की पहचान और संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी गई है। सर्वे और जांच के बाद इन क्षेत्रों में भी नियमानुसार नोटिस तथा आगे की कार्रवाई हो सकती है।

 

काशीपुर जैसे तेजी से फैलते शहर में इस अभियान का असर खासा महत्वपूर्ण हो सकता है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियों का विस्तार, मिश्रित उपयोग वाली इमारतें, सड़क किनारे व्यावसायिक प्रतिष्ठान और विकसित हो रही नई कॉलोनियां नियोजन एवं भवन मानकों की जांच के लिहाज से अहम हैं। हालांकि, काशीपुर में कितने भवनों को नोटिस दिया गया है या कितने निर्माण चिह्नित हुए हैं, इसका कोई पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

 

अब स्थानीय स्तर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विकास प्राधिकरण और निकाय सर्वे किस तरह करते हैं, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई होती है और आम नागरिकों की शिकायतों पर कितनी तेजी से सुनवाई की जाती है।

 

 

हर प्राधिकरण में नोडल अधिकारी, शिकायतों के लिए डिजिटल व्यवस्था

 

निर्देशों के तहत विकास प्राधिकरणों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उनके ईमेल सार्वजनिक करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। शिकायतों के लिए समर्पित डिजिटल पोर्टल संचालित करने की भी बात कही गई है। सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई के दौरान पुलिस तथा जिला प्रशासन की तैनाती रखी जाएगी, ताकि कार्रवाई कानून-व्यवस्था के बीच नियमानुसार पूरी हो सके।

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अभियान में किसी के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए। प्रभावशाली व्यक्ति हो या सामान्य नागरिक, नियमों का उल्लंघन साबित होने पर कार्रवाई का आधार समान होना चाहिए। साथ ही, वैध निर्माणों और आवश्यक अनुमतियों के तहत संचालित कारोबारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

 

 

कार्रवाई के साथ पारदर्शिता भी जरूरी

 

अवैध निर्माणों पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि अनियोजित विकास से यातायात, पार्किंग, जल निकासी, अग्नि सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है। लेकिन किसी भवन को सील करने या ध्वस्त करने से पहले तथ्यों की जांच, संबंधित पक्ष को नोटिस, सुनवाई का अवसर और लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है।

 

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि उत्तराखंड में शुरू हुआ यह अभियान कितनी निष्पक्षता से जमीन पर उतरता है। यदि सर्वे पारदर्शी रहा और कार्रवाई बिना भेदभाव के हुई, तो अनियोजित निर्माण पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। लेकिन असली परीक्षा आदेश जारी करने में नहीं, बल्कि नियमों को समान रूप से लागू करने में होगी।