हरदोई: जहाँ से शुरू हुई होली की परंपरा; जानिए भक्त प्रहलाद और ‘हरि-द्रोही’ की पावन कथा

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हरदोई की पावन धरती, जिसे ‘प्रहलाद नगरी’ के नाम से जाना जाता है, केवल एक शहर नहीं बल्कि होली के त्यौहार का जन्मस्थान मानी जाती है। प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी द्वारा रेखांकित किए गए तथ्य इस जिले के गौरवशाली इतिहास को जीवंत करते हैं।

यहाँ इस पौराणिक संबंध पर आधारित एक विशेष आलेख है:

हरदोई: जैसे-जैसे होली की तारीख नजदीक आ रही है, हरदोई की फिजाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। जहाँ पूरी दुनिया रंगों से होली खेलती है, वहीं हरदोई उस ‘अग्नि-परीक्षा’ को याद करता है जिसने अधर्म पर धर्म की विजय का मार्ग प्रशस्त किया था।

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हरदोई का अर्थ: ‘हरि-द्रोही’ की नगरी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हरदोई का प्राचीन नाम ‘हरिद्रोही’ था। यह दैत्यराज हिरण्यकश्यप की राजधानी थी, जो स्वयं को भगवान मानता था और भगवान विष्णु (हरि) से द्रोह करता था। इसी धरती पर भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ, जिनकी अटूट विष्णु भक्ति ने अंततः असुर राज के अहंकार का अंत किया।

होलिका दहन का ऐतिहासिक साक्षी: प्रहलाद कुंड

शहर में स्थित प्रहलाद कुंड वह स्थल माना जाता है जहाँ इतिहास की सबसे बड़ी अग्नि-परीक्षा हुई थी:

  • अग्नि का कौतुक: हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रहलाद को लेकर चिता पर बैठ गई।

  • भक्ति की जीत: ईश्वरीय कृपा से होलिका उस अग्नि में भस्म हो गई, जबकि प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।

  • सांस्कृतिक धरोहर: प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के अनुसार, यह कुंड आज भी उस अटूट विश्वास का प्रतीक है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य के सामने वह राख हो जाती है।

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आस्था का संगम: होली पर उमड़ता जनसैलाब

होली के दिन हरदोई का वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है।

  • हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रहलाद कुंड और नरसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुँचते हैं।

  • यहाँ की होली केवल गुलाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य और भक्ति के विजय उत्सव के रूप में मनाई जाती है।

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प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य (Key Highlights)

विवरण पौराणिक महत्व
प्राचीन नाम हरिद्रोही (बाद में हरदोई)
मुख्य पात्र भक्त प्रहलाद, हिरण्यकश्यप, होलिका
प्रमुख स्थल प्रहलाद कुंड एवं भगवान नरसिंह मंदिर
सन्देश “सत्यमेव जयते” – सत्य की सदा विजय होती है

शिवम द्विवेदी (अध्यक्ष, प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति) का कहना है कि हरदोई की यह विरासत हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है और नई पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक पहचान से अवगत कराती है।