
राजू अनेजा,नैनीताल।न्याय व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश अब महंगी पड़ने लगी है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि रंजन की अदालत ने पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करने और हाईकोर्ट में झूठा शपथपत्र देकर सुरक्षा हासिल करने के मामले में हरिद्वार के मुस्लिम दंपती को दोषी करार देते हुए दो-दो वर्ष की सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
दोषी ठहराए गए अभियुक्त शाहीन पत्नी शाहरूख और शाहरूख पुत्र अब्दुल रहमान, निवासी लक्कड़ खुर्द, पथरी, फॉरेस्ट रेंज अम्बुवाला, जिला हरिद्वार हैं।
📜 हाईकोर्ट में कहा—“पहला निकाह”, बाद में खुली पोल
सहायक अभियोजन अधिकारी सुमित कन्याल के अनुसार वर्ष 2020 में शाहीन और शाहरूख ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि दोनों ने स्वेच्छा से पहला निकाह किया है और शाहीन को अपने भाइयों से जान का खतरा है। इस दावे के समर्थन में दोनों ने शपथपत्र भी दाखिल किया, जिस पर हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा के आदेश दिए।
लेकिन सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा हुआ—
शाहीन की पहली शादी 17 मार्च 2019 को मोहम्मद साजिद के साथ हो चुकी थी। यह तथ्य याचिका और शपथपत्र में पूरी तरह छिपाया गया।
⚖️ कोर्ट ने माना—जानबूझकर किया गया न्यायालय को गुमराह
कोर्ट में शाहीन ने स्वीकार किया कि उसकी पहली शादी हो चुकी थी और आपसी सुलह के आधार पर विवाह विच्छेद हो गया था, लेकिन तलाक की प्रक्रिया, कारण और समय का कोई प्रमाण या उल्लेख याचिका में नहीं किया गया।
अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि
👉 जानकारी होते हुए भी हाईकोर्ट के समक्ष गलत तथ्यों पर आधारित शपथपत्र पेश किया गया, जो गंभीर अपराध है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट के आदेश पर धारा 193 आईपीसी (कोर्ट में झूठा शपथपत्र व दस्तावेज देना) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।
🗂️ हाईकोर्ट रजिस्ट्रार ने दर्ज कराया परिवाद
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार न्यायिक महेश उपाध्याय द्वारा 11 दिसंबर 2020 को सीजेएम कोर्ट नैनीताल में परिवाद दर्ज कराया गया, जिसे बाद में एसीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।
👊 भाई ने खोली बहन की पोल
एसीजेएम कोर्ट में शाहीन के भाई जैद ने बयान दर्ज कराते हुए कहा कि शाहीन उसकी छोटी बहन है और उसने पहले से शादीशुदा होते हुए चोरी-छिपे शाहरूख से दूसरा निकाह कर लिया।
जैद ने अदालत को बताया कि
शाहीन की साजिद से शादी आज तक वैधानिक रूप से समाप्त नहीं हुई
ज्वालापुर की मस्जिद में किया गया दूसरा निकाह शरीयत और कानून—दोनों की नजर में जायज नहीं
जान का खतरा बताकर हाईकोर्ट में झूठी कहानी गढ़ी गई
जैद की ओर से हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया गया, जबकि शाहीन ने बचाव में खुद को “पढ़ी-लिखी नहीं” बताते हुए पहली शादी छिपाने की दलील दी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।


