उत्तराखंड में कांग्रेस का ‘मिशन-2027’: टिकटों के लिए हाईकमान करा रहा गुप्त सर्वे; नवंबर अंत तक 40 सीटों पर मिल सकता है हरी झंडी का संकेत

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार पिछले दो विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस अब ‘मिशन-2027’ को लेकर पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी नेतृत्व ने चुनाव के लिए सीटवार नया राजनीतिक गणित साधना शुरू कर दिया है। राज्य में बेरोजगारी, लगातार हो रहा पलायन, भर्ती घोटालों, महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर धामी सरकार को घेरने के साथ-साथ कांग्रेस ने जिताऊ प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया भी समय से पहले शुरू कर दी है।
नवंबर के पहले पखवाड़े में पूरा होगा सर्वे; 40 सीटों पर तय होंगे दावेदार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की सहमति के बाद पार्टी हाईकमान राज्य की सभी 70 सीटों पर एक गोपनीय सर्वे करा रहा है। इस सर्वे की रिपोर्ट नवंबर के पहले पखवाड़े तक पूरी हो जाएगी। सर्वे के नतीजों के आधार पर नवंबर के अंत तक लगभग 40 सीटों पर मौजूदा विधायकों और मजबूत संभावित उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी शुरू करने के संकेत दे दिए जाएंगे। वहीं, अधिक राजनीतिक संघर्ष या फंसी हुई बाकी 30 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा बाद के चरणों में रणनीति बनाकर की जाएगी।
20 मौजूदा सीटों को बचाने और 50 पुरानी सीटों पर वापसी की दोहरी चुनौती
उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के 20 विधायक हैं, जिनमें से दो सीटें पार्टी ने हालिया उप-चुनावों में जीती हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपनी मौजूदा 20 सीटों को बचाए रखने के साथ-साथ उन 50 सीटों पर फिर से पैर जमाने की बड़ी चुनौती है, जहां उसे पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था। इसके लिए पार्टी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक व जातीय समीकरणों, जमीनी मुद्दों, स्थानीय संगठन की स्थिति और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता व जमीनी पकड़ का बारीकी से आकलन करवा रही है।
गठबंधन व पार्टी के भीतर आंतरिक सर्वे से मिली बढ़त ने बढ़ाया उत्साह
प्रदेश कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में कराए गए एक शुरुआती राजनीतिक सर्वे में कांग्रेस की स्थिति में सुधार और बढ़त के संकेत मिले हैं। इससे उत्साहित होकर पार्टी हाईकमान ने इस बार टिकट बांटने के पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए ‘दावेदारों की संख्या से अधिक जिताऊ क्षमता (Winability)’ को एकमात्र पैमाना बनाने का फैसला लिया है। सर्वे के माध्यम से मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा भी की जा रही है, ताकि जहां नए और युवा चेहरों की जरूरत हो, वहां समय रहते मजबूत विकल्प उतारे जा सकें।

