पंतनगर में अतिक्रमण हटाने गई टीम का भारी विरोध: संजय और मस्जिद कॉलोनी में नोटिस चस्पा करने पर भड़के लोग; किच्छा विधायक के हस्तक्षेप के बाद बैरंग लौटा प्रशासन

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पंतनगर/किच्छा: ऊधम सिंह नगर जिले के पंतनगर विश्वविद्यालय क्षेत्र अंतर्गत आने वाली संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची प्रशासनिक टीम को स्थानीय निवासियों के जबरदस्त आक्रोश और तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। भारी पुलिस बल के साथ बस्तियों में बेदखली के विधिक नोटिस चस्पा करने पहुंची टीम के सामने सैकड़ों महिलाएं और पुरुष सड़कों पर उतर आए। इसी बीच किच्छा विधानसभा क्षेत्र के विधायक तिलक राज बेहड़ भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई को जनविरोधी बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। बढ़ते तनाव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक टीम को बिना विधिक कार्रवाई पूरी किए ही मजबूरन बैरंग वापस लौटना पड़ा।

20 वर्षों से आबाद हैं बस्तियां; बेघर होने के डर से सड़क पर उतरी जनता

विधिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंतनगर की संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी पिछले करीब दो दशकों (20 वर्षों) से आबाद हैं।

  • सरकारी भूमि पर कब्जा: जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन का विधिक दावा है कि यह पूरी आबादी सरकारी भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर बसाई गई है।

  • पहले भी मिले थे नोटिस: इससे पूर्व भी कई बार इस भूमि को खाली करने के विधिक नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन स्थानीय निवासियों द्वारा कब्जा नहीं छोड़ा गया।

  • अचानक फूटा गुस्सा: इसी क्रम में जब गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ दोबारा अंतिम नोटिस चस्पा करने पहुंचे, तो वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों का धैर्य जवाब दे गया। लोगों ने अपने आशियाने उजड़ने के डर से सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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विधायक तिलक राज बेहड़ ने उठाए सवाल; बोले- “बिना पुनर्वास उजाड़ना तानाशाही”

हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक तिलक राज बेहड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और विधिक नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया को तुरंत रुकवा दिया।

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कॉलोनीवासियों के समर्थन में धरने पर बैठते हुए विधायक बेहड़ ने तीखे विधिक सवाल उठाए और कहा:

“पिछले 20 वर्षों से यहाँ रह रहे हजारों गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक बेघर कर देना पूरी तरह से अमानवीय और जनहित के खिलाफ है। सरकार और प्रशासन का यह रवैया तानाशाहीपूर्ण है। किसी भी विधिक बेदखली या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले सरकार को इन प्रभावित परिवारों के लिए एक ठोस और स्पष्ट पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) तैयार करनी चाहिए। बिना जमीन या मकान दिए हम किसी भी गरीब की झोपड़ी पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे।”

तिलक राज बेहड़, विधायक, किच्छा

टकराव के आसार बढ़े; प्रशासन अब नए सिरे से बनाएगा विधिक रणनीति

बस्ती के निवासियों ने भी दो टूक शब्दों में सरकार से मांग की है कि यदि यह भूमि विधिक रूप से सरकारी है, तो उन्हें किसी अन्य स्थान पर विधिक रूप से विस्थापित किया जाए, अन्यथा वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन खाली नहीं करेंगे।

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स्थानीय जनता के एकजुट विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद बैकफुट पर आई प्रशासनिक टीम को फिलहाल अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे इस पूरी घटना की विधिक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों और शासन को प्रेषित कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला जिला प्रशासन और स्थानीय जनता के बीच एक बड़े विधिक टकराव का रूप ले सकता है, जिसकी दिशा अब शासन के अगले रुख और पुनर्वास नीति पर तय होगी।

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