शिलापट्ट पर शुभारंभ, धरातल पर सड़क गायब! मोहन के ‘विकास’ की सीएम पोर्टल ने खोली पोल

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राजू अनेजा,लालकुआं। विकास कार्यों के नाम पर शिलापट्ट लगाने और शुभारंभ करने के बावजूद यदि महीनों तक सड़क पर निर्माण की एक ईंट भी न लगे तो सवाल उठना लाजिमी है। लालकुआं में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां करीब दो माह पहले सड़क निर्माण का शुभारंभ शिलापट्ट लगाकर कर दिया गया, लेकिन आज तक धरातल पर सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ। मामला तब और गंभीर हो गया, जब सड़क निर्माण की हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल का दरवाजा खटखटाया गया। वहां से सामने आई जानकारी ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए—उक्त सड़क का टेंडर ही निरस्त हो चुका है।अब नया टेंडर 16 को होगा।

 

 

शिलापट्ट लग गया, शुभारंभ भी हो गया, लेकिन सड़क निर्माण भूल गए नेता जी!

 

 

संबंधित मार्ग पर सड़क निर्माण का शिलापट्ट लगाया गया और बाकायदा शुभारंभ किया गया। शिलापट्ट देखकर ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब उनके मार्ग की बदहाली दूर होगी और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
लेकिन शुभारंभ के करीब दो माह बाद भी सड़क पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। मौके पर न निर्माण सामग्री पहुंची और न ही सड़क निर्माण की कोई गतिविधि दिखाई दी।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर शुभारंभ के बाद सड़क निर्माण की फाइल कहां अटक गई?

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सीएम पोर्टल पर जानकारी मांगी तो खुल गई पूरी पोल

 

प्रमुख समाजसेवी कमल दुम्का ने जब उक्त सड़क के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और काम शुरू न होने की वजह जाननी चाही तो मामले की हकीकत सामने आई।
पोर्टल से मिली जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण का टेंडर निरस्त हो चुका है।
यानी जिस सड़क के निर्माण का शिलापट्ट लगाकर शुभारंभ किया गया था, उसके लिए जारी टेंडर ही निरस्त हो चुका है। इसके बाद अब सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब टेंडर निरस्त था तो सड़क निर्माण का शुभारंभ किस आधार पर किया गया?

 

कमल दुम्का बोले—बिना मेरी जानकारी के लगा दिया शुभारंभ का पत्थर

मामले को लेकर प्रमुख समाजसेवी कमल दुम्का से सीधी बातचीत की गई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए पूरा घटनाक्रम साझा किया।
उन्होंने बताया कि बिना उनकी जानकारी के उनके घर तक जाने वाले मार्ग पर शुभारंभ का पत्थर लगा दिया गया। जब महीनों तक काम शुरू नहीं हुआ तो उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर इसकी जानकारी मांगी।
कमल दुम्का ने बताया कि मुख्यमंत्री पोर्टल से जानकारी लेने पर पता चला कि सड़क का टेंडर ही निरस्त हो चुका है।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह केवल श्रेय लेने का प्रयास है। यदि शासन-प्रशासन ने इस मार्ग का निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा नहीं कराया, तो मैं न्याय के लिए न्यायालय की शरण में जाऊंगा।”

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विकास का शिलापट्ट तो लग गया, लेकिन विकास धरातल से गायब

 

इस पूरे मामले ने विकास कार्यों की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर किसी निर्माण कार्य के शुभारंभ के बाद लोगों को उम्मीद होती है कि जल्द ही काम शुरू होगा और उन्हें सुविधा मिलेगी।
लेकिन यहां स्थिति उलट नजर आ रही है। शुभारंभ पहले हो गया और अब पता चल रहा है कि टेंडर ही निरस्त हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें शिलापट्ट से ज्यादा सड़क की जरूरत है। यदि सड़क का निर्माण होना है तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि नया टेंडर कब होगा और काम कब शुरू किया जाएगा।

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अब सवाल—शुभारंभ के बाद सड़क कब बनेगी?

करीब दो माह से शिलापट्ट अपनी जगह खड़ा है, लेकिन सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। सीएम पोर्टल से टेंडर निरस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
अब लोगों की निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि निरस्त टेंडर के बाद नई प्रक्रिया कब शुरू होगी और सड़क निर्माण की पहली कुदाल आखिर कब चलेगी।
विकास के दावों के बीच फिलहाल तस्वीर यही है—शिलापट्ट पर शुभारंभ दर्ज है, लेकिन धरातल पर सड़क गायब है।

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