देहरादून के प्रेमनगर में संस्थान पर छापा: बच्चों की शिक्षा की आड़ में धर्मांतरण और इंटरनेशनल फंडिंग का शक; पुलिस को सौंपे दस्तावेज

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देहरादून: राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा, सामाजिक सेवा और सहायता के नाम पर संचालित एक संस्थान में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के नेतृत्व में आयोग की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में प्रथम दृष्टया धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने और विदेशी स्रोतों से आर्थिक सहायता (अंतरराष्ट्रीय फंडिंग) प्राप्त होने के विधिक संकेत मिले हैं। मामले की गंभीरता और कार्यक्षेत्र की सीमाओं को देखते हुए आयोग ने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और साक्ष्य अग्रिम विधिक जांच व आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दिए हैं।

शिक्षा की आड़ में विशेष धार्मिक विचारधारा का प्रचार; परिसर से मिले संदेहास्पद पोस्टर और साहित्य

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मामले की प्रशासनिक जानकारी देते हुए बताया कि प्रेमनगर स्थित संस्थान के निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम को भारी मात्रा में रजिस्टर, प्रचार सामग्री, पोस्टर और फाइलें बरामद हुई हैं।

  • वास्तविक उद्देश्य पर सवाल: बरामद विधिक दस्तावेजों और अभिलेखों की प्रारंभिक जांच से यह प्रतीत होता है कि इस संस्थान का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रदान करना नहीं था।

  • धर्मांतरण का शक: संस्थान का मुख्य फोकस लोगों को एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर आकर्षित करना और सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना था। परिसर में चस्पा पोस्टर और उपलब्ध साहित्य पूरी तरह इसी गुप्त एजेंडे की ओर विधिक संकेत करते पाए गए हैं।

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शैक्षणिक ढांचा गायब; स्टाफ में मणिपुर का चालक और परिसर में पौड़ी का परिवार सक्रिय

आयोग की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि संस्थान के भीतर स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक या विधिक गतिविधियों का कोई भी स्पष्ट, प्रामाणिक और व्यवस्थित स्वरूप मौजूद नहीं था। स्टाफ और प्रबंधन के नाम पर वहां केवल मणिपुर निवासी एक चालक कार्यरत पाया गया। इसके अतिरिक्त, मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले से संबंधित एक परिवार पिछले कई सालों से इसी परिसर में अवैध रूप से रह रहा है और संस्थान की संदिग्ध गतिविधियों के संचालन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ पाया गया है।

दिव्यांग बच्चों के नाम पर फंडिंग का प्रलोभन; कैनाल रोड स्थित अस्पताल और विदेशी नेटवर्क की जांच शुरू

डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि प्रारंभिक तथ्यों से यह भी संकेत मिले हैं कि संस्थान द्वारा दिव्यांग (मूक-बधिर व अक्षम) बच्चों और उनके असहाय परिवारों की सहायता करने का विधिक ढोंग रचकर तमाम सरकारी विभागों, संस्थाओं एवं अन्य स्रोतों से मोटी आर्थिक सहायता ऐंठने का प्रयास किया जाता था।

  • प्रलोभन का खेल: गरीब लोगों को विभिन्न प्रकार के आर्थिक लाभ, सामाजिक सहायता और सुविधाओं का प्रलोभन देकर उनके मूल धार्मिक विश्वासों को प्रभावित व परिवर्तित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा था।

  • अस्पताल से कनेक्शन: निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे गोपनीय दस्तावेज भी हाथ लगे हैं, जिनसे इस संस्थान का विधिक संबंध देहरादून के कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल से होने की प्रबल संभावना मिली है, जिसकी गहनता से जांच की जा रही है।

  • अंतरराष्ट्रीय फंडिंग के संकेत: आयोग के संज्ञान में यह तथ्य भी आया है कि इस बड़े नेटवर्क की गतिविधियां केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य राज्यों में भी इसके तार जुड़े हैं। दस्तावेजों में विदेशी स्रोतों से अंतरराष्ट्रीय फंडिंग प्राप्त होने के पुख्ता विधिक संकेत दिखाई दिए हैं, जिसकी विस्तृत जांच अब सक्षम केंद्रीय जांच एजेंसियों से कराए जाने की सिफारिश की गई है।

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बच्चों की मासूमियत का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं; पुलिस करेगी कड़ी वैधानिक कार्रवाई

आयोग की अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों की मासूमियत, उनकी कंगाली, आर्थिक स्थिति और दिव्यांगता जैसी लाचारी का उपयोग किसी भी प्रकार के धार्मिक, वैचारिक अथवा छिपे हुए राष्ट्रविरोधी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाना एक अत्यंत गंभीर और दंडात्मक श्रेणी का मामला है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण विधिक शिक्षा, संरक्षण और नैतिक संस्कार उपलब्ध कराना समाज का दायित्व है, न कि उन्हें किसी प्रलोभन या दबाव का जरिया बनाना।

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चूंकि कई विषय आयोग के प्रत्यक्ष विधिक कार्यक्षेत्र से बाहर के हैं, इसलिए विधिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करते हुए सभी दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं। डॉ. खन्ना ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त विधिक जांच में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, विदेशी वित्तपोषण (FCRA) के दुरुपयोग, अवैध धर्मांतरण या बाल अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित दोषी व्यक्तियों और संस्था के संचालकों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।