
राजू अनेजा,काशीपुर। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद काशीपुर नगर निगम प्रशासनिक दृढ़ता और पारदर्शिता का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। वर्ष 2025-26 को नगर निगम के इतिहास में निर्णायक अध्याय के रूप में दर्ज किया जा रहा है, जहां विवाह निबंधक/नगर आयुक्त रविन्दर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में कानून को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया।
नगर निगम काशीपुर ने स्पष्ट कर दिया कि समान नागरिक संहिता महज़ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अधिकार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समानता को प्रशासन ने सख्ती और संवेदनशीलता के संतुलन के साथ लागू किया।
जागरूकता से विश्वास तक
कानून लागू होते ही नगर निगम ने मुनादी, सार्वजनिक घोषणाएं और वार्ड स्तरीय शिविरों के जरिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। विवाह निबंधक रविन्दर सिंह बिष्ट के निर्देश पर कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि हर नागरिक को सम्मानजनक व्यवहार और समयबद्ध सेवा मिल सके। प्रशासन ने साफ संदेश दिया—कानून का उद्देश्य दंड नहीं, न्याय है।
पारदर्शी पंजीकरण, समयबद्ध सेवा
विवाह एवं तलाक पंजीकरण में 250 रुपये शुल्क पर 15 दिन और तत्काल सेवा में 2500 रुपये शुल्क पर तीन दिन की समय-सीमा तय की गई। उप-पंजीयक स्तर से प्रतिवेदन एक दिन में उपलब्ध कराने और स्पष्ट अपील व्यवस्था से व्यवस्था में पारदर्शिता आई और जनता का भरोसा बढ़ा।
उत्तराधिकार में ऐतिहासिक बदलाव
बेटियों को संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार, बिना वसीयत मृत्यु पर परिवार के सभी सदस्यों को समान हक और लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को वैध उत्तराधिकार—ये बदलाव समान नागरिक संहिता को सामाजिक बदलाव का औजार बनाते हैं। नगर निगम ने इन प्रावधानों को संवेदनशीलता के साथ लागू कर नई मिसाल कायम की।
आंकड़े खुद बोलते हैं
समान नागरिक संहिता के तहत नगर निगम काशीपुर में 5280 आवेदन, जिनमें 5081 स्वीकृत हुए। मात्र 60 आवेदन अस्वीकृत—यानी 96% से अधिक स्वीकृति दर। यह आंकड़ा प्रशासनिक ईमानदारी, स्पष्ट दिशा और प्रभावी मार्गदर्शन का प्रमाण है।
आगे की राह
नगर निगम का लक्ष्य 100 प्रतिशत डिजिटल पंजीकरण, और व्यापक सामाजिक जागरूकता है। रविन्दर सिंह बिष्ट के अनुसार काशीपुर मॉडल आने वाले समय में प्रदेश के अन्य निकायों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगा।
निष्कर्ष:
समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में काशीपुर नगर निगम ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, साफ नीति और संवेदनशील प्रशासन से कानून सामाजिक बदलाव की ताकत बन सकता है।


