कुमाऊं के सबसे बड़े 50 बेड आयुर्वेद अस्पताल हल्द्वानी में शुरू हुई ‘लीच थेरेपी’: जोंक से हो रहा चर्म रोग, वैरिकोज वेन्स और यूरिक एसिड का सफल इलाज
हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े 50 बेड वाले राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय, हल्द्वानी में अब ‘जलौकावचारण’ यानी लीच थेरेपी (Leech Therapy) की आधुनिक सुविधा शुरू हो गई है। आमतौर पर जंगलों व पहाड़ी क्षेत्रों में जोंक का नाम सुनते ही लोग सहम जाते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में यही जोंक गंभीर बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित हो रही है। इस थेरेपी में विशेष रूप से तैयार जोंक को मरीज के प्रभावित हिस्से पर चिपकाया जाता है, जो शरीर के खराब व दूषित रक्त को बाहर निकालकर संबंधित बीमारी को जड़ से ठीक करने में मदद करती है।
जानिए कैसे करती है काम यह प्राचीन आयुर्वेदिक थेरेपी?
चिकित्सा पद्धति की भाषा में इसे ‘जलौकावचारण’ कहा जाता है। इसमें जोंक को मरीज के शरीर के उसी हिस्से पर रखा जाता है, जहाँ विकार या समस्या होती है। गंदा खून चूसने के दौरान जोंक अपने लार से रक्त में ‘हीरुडीन’ (Hirudin) नामक विशेष एंजाइम छोड़ती है, जो खून को जमने नहीं देता और रक्त प्रवाह को सुचारू बनाता है। गंदा खून चूसने के बाद जोंक को सुरक्षित हटाकर हल्दी के उपयोग से उल्टी कराई जाती है, जिससे जोंक भी सुरक्षित रहती है। यह थेरेपी चर्म रोग, वैरिकोज वेन्स, यूरिक एसिड बढ़ने से होने वाले दर्द, ट्यूमर तथा नेत्र संबंधी कुछ रोगों में अत्यंत कारगर साबित हो रही है।
अब तक 15 से अधिक मरीजों का हो चुका है सफल इलाज
हल्द्वानी आयुर्वेद चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह मेहरा ने बताया कि अस्पताल में अब तक 15 से 16 मरीजों को लीच थेरेपी के सेशन दिए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है और उनका रोग सफलतापूर्वक ठीक हो गया है। इस सुविधा के शुरू होने से अब पूरे कुमाऊं क्षेत्र के मरीजों को प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति से जटिल रोगों के उपचार का लाभ स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है।
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