लालकुआं बैंक से जुड़े मामले में अदालत का कड़ा फैसला! ₹2.61 लाख का चेक बाउंस पर 6 माह जेल के साथ ही दोषी पर ₹1.93 लाख जुर्माना भी ठोका

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राजू अनेजा, लालकुआं/हल्द्वानी। बैंक का चेक देना और खाते में पर्याप्त रकम न होना अभियुक्त मो. मुस्ताक अहमद को भारी पड़ गया। करीब 2.61 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी करार दिया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (विशेष एनआई एक्ट), हल्द्वानी की अदालत ने दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 1 लाख 93 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

चेक लगा, लेकिन खाते में रकम नहीं थी

मामला काशीपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की लालकुआं शाखा से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार अभियुक्त की ओर से 2,61,792 रुपये का चेक जारी किया गया था। चेक की तारीख 5 अप्रैल 2022 थी। बैंक में भुगतान के लिए चेक प्रस्तुत किए जाने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं मिली और चेक “Funds Insufficient” की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया।

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नोटिस के बाद भी नहीं हुआ भुगतान

चेक अनादरित होने के बाद बैंक की ओर से नियमानुसार अभियुक्त को कानूनी नोटिस भेजकर बकाया रकम का भुगतान करने का अवसर दिया गया। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर बैंक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अभियुक्त के खिलाफ एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत मुकदमा चलाया गया।

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चार साल चली कानूनी लड़ाई, अब आया फैसला

मामला वर्ष 2022 में अदालत पहुंचा। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष बैंक की ओर से चेक और उससे जुड़े दस्तावेज व साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने अभियुक्त को चेक अनादरण के अपराध का दोषी माना।

अदालत का फैसला—छह माह जेल और ₹1.93 लाख जुर्माना

12 अगस्त 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने अभियुक्त मो. मुस्ताक अहमद को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषसिद्ध करते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 1,93,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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चेक बाउंस के इस मामले में अदालत के फैसले ने साफ कर दिया कि बैंकिंग लेनदेन में चेक जारी करना महज औपचारिकता नहीं है। खाते में पर्याप्त धनराशि न होने पर चेक बाउंस होने और कानूनी नोटिस के बावजूद भुगतान न करने की स्थिति में मामला जेल की सजा तक पहुंच सकता है।

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