हाथियों के आपसी संघर्ष के बाद घायल ‘मखने’ का बाघ ने किया शिकार; श्यामपुर रेंज में हुई मौत

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हरिद्वार: हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज से प्रकृति के क्रूर चक्र की एक दुर्लभ और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ खारा चौकी के समीप एक मखने हाथी (बिना दांत वाला नर हाथी) की मौत हो गई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि घायल हाथी पर बाघ ने भी हमला कर उसे अपना निवाला बनाने की कोशिश की।


📉 घटनाक्रम: गश्त के दौरान मिला शव

घटना सोमवार सुबह की है जब वन कर्मी खारा चौकी के समीप गश्त पर थे:

  • लोकेशन: श्यामपुर और चीला रेंज के मिलान बिंदु पर स्थित खारा चौकी से मात्र 200 मीटर की दूरी पर हाथी का शव बरामद हुआ।

  • संघर्ष के निशान: घटनास्थल के आसपास की मिट्टी खुदी हुई थी, जिससे स्पष्ट संकेत मिले कि यहाँ दो हाथियों के बीच जबरदस्त वर्चस्व की लड़ाई हुई थी।

  • बाघ का हमला: हाथी के शरीर पर बाघ के पंजों के निशान और घाव पाए गए। बाघ ने हाथी के कान के नीचे और पिछले हिस्से का मांस भी खा लिया था।

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🔍 जांच और विशेषज्ञों की राय

वन विभाग के आलाधिकारियों और डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया:

  • दोहरा हमला: उप प्रभागीय वनाधिकारी पूनम कैंथोला के अनुसार, संभवतः अन्य हाथी से संघर्ष के दौरान मखना हाथी गंभीर रूप से घायल होकर गिर गया था। इसी लाचारी की स्थिति में बाघ ने उस पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया।

  • उम्र और स्वास्थ्य: पार्क के डॉक्टर अमित ध्यानी और डॉ. विवेकानंद सती ने बताया कि मृत हाथी की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष के बीच थी।

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⚖️ वन विभाग की कार्रवाई

  1. पोस्टमार्टम: डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही हाथी के शव का पोस्टमार्टम कर मौत के सटीक कारणों की पुष्टि की।

  2. निस्तारण: स्वास्थ्य परीक्षण और वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद हाथी के शव को नियमानुसार जंगल में ही दफना दिया गया है।

  3. निगरानी: क्षेत्र में बाघ के पद चिह्न मिलने के बाद वन विभाग ने गश्त बढ़ा दी है ताकि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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क्या आप जानते हैं? ‘मखना’ उन नर हाथियों को कहा जाता है जिनके जन्मजात दांत (Tusks) नहीं होते। हाथियों के आपसी संघर्ष में अक्सर गंभीर चोटें जानलेवा साबित होती हैं, और घायल अवस्था में ये विशालकाय जीव भी हिंसक मांसाहारियों के निशाने पर आ जाते हैं।

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