बिन्दुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर ज्ञापन: वनाधिकार समिति ने मुख्यमंत्री से की अधिसूचना जारी करने की मांग
लालकुआं: बिन्दुखत्ता क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर वनाधिकार समिति के सदस्यों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है। समिति ने वनाधिकार अधिनियम (FRA) के तहत बिन्दुखत्ता के सामुदायिक दावे को निरस्त करने के प्रयासों पर आपत्ति जताते हुए, पूर्व में स्वीकृत आख्या के आधार पर तत्काल राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग की है।
स्थानीय तहसील में राजस्व निरीक्षक मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए समिति ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
📌 समिति की प्रमुख आपत्तियाँ और माँगें
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योजनाओं के लाभ से वंचित: बिन्दुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग वर्षों से लम्बित है, जिसके कारण क्षेत्र के लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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दावा निरस्त करने का प्रयास: समिति ने रोष व्यक्त किया कि एक ओर मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद बिन्दुखत्ता राजस्व ग्राम की घोषणा निरस्त हुई, और दूसरी ओर वनाधिकार कानून (FRA) के तहत पूर्व में स्वीकृत सामुदायिक दावे को आपत्ति लगाकर पुनः परीक्षण हेतु अधीनस्थ समितियों को भेजा गया, जो FRA की भावना के विरुद्ध है।
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नियम विरुद्ध प्रयास: समिति को जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री घोषणा के बाद अब बिन्दुखत्ता के दावे को नियमविरूद्ध निरस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्रक्रिया पर संदेह: गत 17 फरवरी से एफआरए के तहत राजस्व गांव के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसे शासन ने वापस लौटा दिया था। अब यह प्रक्रिया पुनः शुरू होने के बावजूद, समिति को संदेह है कि शासन स्तर पर इसे महत्व नहीं दिया जा रहा है।
वनाधिकार समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से तत्काल स्वीकृत आख्या के आधार पर बिन्दुखत्ता राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करवाने की जोरदार मांग की है।
👥 ज्ञापन देने वाले प्रमुख पदाधिकारी
ज्ञापन देने वालों में प्रमोद कॉलोनी, बलवंत सिंह बिष्ट, देवी दत्त पांडे, भगवान सिंह मांजिला, नवीन चंद्र जोशी सहित भारी संख्या में पदाधिकारी मौजूद थे।

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