मां नंदा की लोकजात संपन्न: 19 पड़ावों के बाद सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंची देवी की डोली
गोपेश्वर (चमोली): छह माह तक अपने ननिहाल देवराड़ा में प्रवास करने के बाद, मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली मंगलवार (13 जनवरी) को अपने मुख्य धाम सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंच गई है। ‘मां नंदा के जयकारों’ से पूरा कुरुड़ क्षेत्र गुंजायमान रहा। अब आगामी छह माह तक देवी इसी सिद्धपीठ में विराजमान रहेंगी।
🛤️ आस्था का सफर: देवराड़ा से कुरुड़ तक
मां नंदा की यह वार्षिक लोकजात पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई:
-
प्रस्थान: देवी की डोली ने 25 दिसंबर को अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर से विदाई ली थी।
-
यात्रा का मार्ग: यात्रा के दौरान डोली ने 19 विभिन्न पड़ावों पर रात्रि विश्राम किया और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
-
मुख्य पड़ाव: बजवाड़, मेलठा, किमनी, नैल, कुलसारी, नोण, मेटा तल्ला, गैरबारम, बामणगांव, देवपुरी, नागोली, मरोड़ा, हंसकोटी, बैनोली, पैठाणी, सिमली, सणकोट और सैती।
☀️ उत्तरायण और मकर संक्रांति का महत्व
नंदा की डोली की वापसी का समय बेहद खास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
-
देवी की डोली हमेशा उत्तरायण शुरू होने पर अपने मंदिर पहुंचती है।
-
आज बुधवार (14 जनवरी) को सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं (मकर संक्रांति), जिससे सूर्य उत्तरायण हो गए हैं। इसी शुभ घड़ी के स्वागत में डोली मंगलवार को कुरुड़ पहुंची।
🌸 भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान
-
अंतिम पड़ाव: सोमवार को डोली सैती गांव पहुंची थी, जहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और भजन-कीर्तन के साथ भव्य स्वागत किया।
-
कुरुड़ आगमन: मंगलवार को पूजा-अर्चना के बाद डोली सिद्धदेश्वर महादेव मंदिर (नंदानगर) होते हुए कुरुड़ पहुंची।
-
भंडारा और सेवा: हल्द्वानी से आए भक्त सुरेश प्रेमी और उनकी टीम ने इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया।
-
मुख्य पुजारी: मंदिर के गौड़ पुजारी उमेशचंद्र, मनोहर प्रसाद, किशोर प्रसाद, विजय प्रसाद, पारेश्वर गौड़ और दिनेश गौड़ ने विधिवत पूजा संपन्न कराई।

अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

