हजारीबाग (2 अप्रैल 2026): डीआईजी अंजनी झा और एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता कर इस सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह हत्या पूरी तरह से तांत्रिक क्रियाओं और अंधविश्वास का परिणाम है।
1. घटना का मुख्य कारण: ‘नरबलि’ और अंधविश्वास
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वजह: मुख्य आरोपी महिला रेशमी देवी का बेटा लंबे समय से बीमार था। एक महिला तांत्रिक ने उसे विश्वास दिलाया कि यदि वह अपनी बेटी की बलि देती है, तो उसका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा।
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वारदात: मां ने तांत्रिक के कहने पर अपनी ही बेटी को तांत्रिक क्रिया के लिए ले जाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
2. SIT की जांच और गिरफ्तारियां
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य किरदारों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है:
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गिरफ्तार आरोपी: मां (रेशमी देवी), एक अन्य सहयोगी और वह महिला तांत्रिक जिसने इस कृत्य के लिए उकसाया था।
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दुष्कर्म की अफवाह पर विराम: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने साफ किया कि यह केवल अंधविश्वास जनित हत्या का मामला है।
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अवैध संबंधों का एंगल: जांच में परिवार के भीतर अवैध संबंधों की बात भी सामने आई है, जिसने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है।
3. प्रशासन का सख्त रुख और मुआवजे पर रोक
चूंकि इस जघन्य अपराध में परिवार (स्वयं मां) की सीधी संलिप्तता और साजिश साबित हो चुकी है, इसलिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है:
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मुआवजा निरस्त: आमतौर पर ऐसी घटनाओं में मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि रक्षक ही भक्षक बन गया है।
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सामाजिक संदेश: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंधविश्वास के नाम पर किए गए ऐसे कृत्यों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।

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