संकट में पहाड़: उत्तराखंड में ‘सूखी ठंड’ ने बढ़ाई चिंता, पर्यटन ठप और समय से पहले खिलने लगा बुरांश

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देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में इस साल कुदरत के बदलते मिजाज ने विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों को चिंता में डाल दिया है। सर्दियों के चरम पर होने के बावजूद पहाड़ बर्फबारी और मैदान बारिश को तरस रहे हैं। इस असामान्य शुष्क मौसम (Dry Spell) का सीधा प्रहार अब राज्य के पर्यटन, आर्थिकी और पारिस्थितिकी (Ecology) पर दिखने लगा है।

❄️ 22 जनवरी से मामूली राहत की उम्मीद

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, एक लंबे इंतजार के बाद 22 जनवरी से मौसम में हल्का बदलाव आ सकता है:

  • इन जिलों में वर्षा/हिमपात: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़।

  • बर्फबारी की सीमा: 3000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही हल्की बर्फबारी के आसार हैं।

  • मैदानी क्षेत्र: देहरादून सहित मैदानी इलाकों में फिलहाल मौसम शुष्क ही रहने का अनुमान है।

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📉 पर्यटन व्यवसाय पर ‘सूखे’ की मार

बर्फबारी न होने के कारण उत्तराखंड का शीतकालीन पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

  • खाली पड़े बेस कैंप: औली और बेदनी बुग्याल जैसी जगहें, जो अब तक बर्फ से ढक जानी चाहिए थीं, वहां केवल सूखी चोटियां नजर आ रही हैं।

  • पर्यटकों का टोटा: लोहाजंग क्षेत्र का उदाहरण लें, तो जहाँ पिछले साल रोजाना 1000 पर्यटक पहुँचते थे, इस साल 10 जनवरी तक केवल 296 पर्यटक ही आए हैं।

  • आर्थिकी को चोट: होमस्टे, गाइड और ट्रैकिंग कंपनियों से जुड़े लोगों के लिए यह सीजन अब तक का सबसे निराशाजनक सीजन साबित हो रहा है।

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🌸 खतरे की घंटी: समय से पहले खिला ‘बुरांश’

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे डरावना असर पहाड़ों की वनस्पति पर दिख रहा है।

  • असमय खिलना: उत्तराखंड का राज्य पुष्प ‘बुरांश’, जो आमतौर पर मार्च में खिलता है, वह जनवरी के मध्य में ही खिलने लगा है।

  • प्रभाव: समय से पहले फूल खिलने से उसकी गुणवत्ता और शहद उत्पादन पर असर पड़ेगा। साथ ही, उन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी भी प्रभावित होगी जो बुरांश के जूस और उत्पादों से अपनी आजीविका चलाती हैं।

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🌡️ पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर

  • धूप की तपिश: देहरादून जैसे शहरों में दिन की तेज धूप से सर्दी का अहसास कम हो गया है।

  • वायु गुणवत्ता: बारिश न होने से धूल और प्रदूषण के कण हवा में जमे हुए हैं, जिससे सांस संबंधी रोगों का खतरा बढ़ गया है और AQI प्रभावित हो रहा है।

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