हल्द्वानी एसटीएच में न्यूरोसर्जरी ठप: जूनियर डॉक्टरों की कमी से 16 मरीजों का ऑपरेशन रुका, कुमाऊं के 400 मरीज प्रभावित
हल्द्वानी: डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में न्यूरोसर्जरी विभाग की गतिविधियाँ पिछले एक पखवाड़े (15 दिन) से पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मस्तिष्क और रीढ़ संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
📉 ऑपरेशन और मरीज़ों की स्थिति
| विवरण | संख्या/स्थिति |
| भर्ती मरीज़ | 25 |
| ऑपरेशन का इंतजार कर रहे मरीज़ | 11 |
| सोमवार को प्लांट ऑपरेशन | 5 |
| ऑपरेशन क्यों रुका | जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी |
| नियमित संचालन हेतु आवश्यकता | 7 से 8 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर |
| वर्तमान में उपलब्ध जूनियर डॉक्टर | केवल 1 (पहले तैनात 6 में से 5 छोड़ चुके हैं) |
जूनियर डॉक्टरों की कमी के कारण विभाग को कुछ प्लांट की गई सर्जरी रोकनी पड़ी हैं, और नए मरीजों को भर्ती भी नहीं किया जा रहा है।
👥 मरीज परेशान, नहीं मिल पा रही उचित देखभाल
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गंभीर मरीज़ों की देखभाल: ऑपरेशन किए गए मरीजों की 24 घंटे देखभाल के लिए पहले 6 जूनियर डॉक्टर थे, लेकिन अब एकमात्र डॉक्टर सेवा दे रहा है। इसके चलते ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों को भी उचित देखभाल नहीं मिल पा रही है।
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ट्रामा सेंटर में दिक्कत: ट्रामा सेंटर में भर्ती सर्जरी कराए मरीजों, जैसे पिथौरागढ़ के विरेन्द्रर सिंह और रीढ़ की हड्डी के मरीज अजीम खान, के परिजनों ने उचित देखभाल न मिलने की शिकायत की है।
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इंतजार कर रहे मरीज: मुखानी की नीरु कश्यप 19 दिसंबर से छत से गिरने के बाद ऑपरेशन का इंतजार कर रही हैं। गंगोलीहाट निवासी हीरा बल्लभ 30 दिसंबर से रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन के लिए भर्ती हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टर न होने से ऑपरेशन रुका हुआ है।
💸 आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर बोझ
कुमाऊं के दूरदराज इलाकों से इलाज के लिए एसटीएच आने वाले मरीजों को अब मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है:
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एसटीएच: आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज होता है, परामर्श शुल्क ₹20 है।
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निजी अस्पताल: परामर्श शुल्क ₹500 से अधिक और इलाज का खर्चा लाखों में होता है।
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परिणाम: आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
📞 कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया
डॉ. जीएस तितियाल, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी ने स्थिति की पुष्टि की है:
“न्यूरो सर्जरी विभाग में जूनियर डॉक्टरों का संकट है जिसके चलते आपरेशन में दिक्कत आ रही है। अन्य विभागों से जूनियर डॉक्टर जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले में न्यूरो सर्जरी के सीनियर डॉक्टरों से भी कहा है कि वह जूनियर डॉक्टरों की भर्ती के लिए अपने स्तर पर भी प्रयास करें।”
न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अभिषेक राज ने भी कॉलेज प्रबंधन को पत्र लिखकर जूनियर डॉक्टरों की मांग की है।

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