खनन से 1025 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, अवैध खनन पर 74 करोड़ का जुर्माना

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देहरादून: प्रदेश सरकार को इस वर्ष खनन से 1025 करोड़ रुपये के राजस्व मिला है। जबकि अवैध परिवहन, अवैध खनन और अवैध भंडारण से 74.22 करोड़ की रिकार्ड धनराशि वसूली भी की गई है।

प्रदेश में खनन राजस्व देने वाले प्रमुख विभागों में से एक है। लेकिन अभी तक सरकार को लक्ष्य के अनुरूप राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष खनन विभाग ने खनन नीति में बदलाव करने के बाद व्यवस्था में सुधार किया है।

खनन निदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि खनन विभाग ने इस बार 875 करोड़ रुपये का राजस्व वसूली लक्ष्य रखा था। इसके सापेक्ष इस वर्ष अभी तक विभाग 1025 करोड़ का राजस्व अर्जित कर चुका है।

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राज्य गठन के बाद पहली बार विभाग ने इतना राजस्व अर्जित किया है। वित्तीय वर्ष के अंत तक इस राशि के 1100 करोड़ के पार होेने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अवैध खनन पर प्रभावी रोकथाम के लिए जिला स्तर पर एंटी इलीगल माइनिंग टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

इसमें राजस्व विभाग, खनन विभाग, वन विभाग व पुलिस के साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञ व ग्राम प्रधान को सदस्य बनाया गया है। राज्य में अवैध खनन, अवैध भंडारण व अवैध परिवहन पर छापेमारी की जाती है। यही कारण है कि इस वर्ष 2176 प्रकरणों में 74.22 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। वर्ष 2020-21 में 2752 प्रकरणों में 18.05 करोड़ का जुर्माना वसूला गया था।

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उन्होंने कहा कि जनसाधारण की शिकायतों के लिए राज्य स्तर पर गठित सीएम हेल्पलाइन 1905 एवं एकीकृत जनता शिकायत निवारण एवं निगरानी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें अवैध खनन से संबंधित शिकायतों का निस्तारण किया जाता है।

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इसके साथ ही सीमाओं पर 45 खनन चेक पोस्ट स्थापित की जा रही हैं, जो नाइट विजन कैमरा व आटोमेटेड सर्विलांस सिस्टम से लैस होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध खनन की बातें भ्रामक हैं।

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