रुड़की बनारसी कांड: दो गुटों में खूनी संघर्ष; 2 की मौत, 40 से अधिक लोगों को हिरासत में.. गांव छावनी में तब्दील

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रुड़की के बनारसी गांव में संत रविदास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भंडारे के बाद हुआ विवाद अब एक गंभीर सांप्रदायिक और सामाजिक संकट में बदल गया है। दो मौतों और बड़े पैमाने पर हुई आगजनी ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

इस हिंसक घटनाक्रम और अब तक की पुलिस कार्रवाई का विवरण नीचे दिया गया है:


🚨 रुड़की बनारसी कांड: दो गुटों में खूनी संघर्ष; 2 की मौत, गांव छावनी में तब्दील

घटना का समय: रविवार शाम (भंडारे की समाप्ति के बाद)।

मुख्य कारण: जंगल की तरफ शौच के लिए जा रहे युवकों और दूसरे पक्ष के बीच मामूली कहासुनी, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।

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🔫 गोलीबारी और हताहतों का विवरण

  • अंधाधुंध फायरिंग: आरोप है कि दूसरे पक्ष के 30-35 लोगों ने अवैध हथियारों से लैस होकर हमला किया।

  • मृतक: 27 वर्षीय आनंद की मौके पर ही पेट में गोली लगने से मौत हो गई। बाद में एक अन्य व्यक्ति की भी जान जाने की पुष्टि हुई है।

  • घायल: आनंद का भाई विशल, चेहरे पर छर्रे लगने से योगेंद्र और पैर में गोली लगने से गगनदीप गंभीर रूप से घायल हैं। एक अन्य युवक जोनी के सिर पर तमंचे की बट से वार किया गया।

🔥 जवाबी हिंसा और आगजनी

घटना से भड़की भीड़ ने मुख्य आरोपी के घर पर धावा बोल दिया:

  • आगजनी: मुख्य आरोपी का घर और दो बाइक पूरी तरह जला दी गईं।

  • तोड़फोड़: गांव के करीब 7 घरों में जमकर तोड़फोड़ की गई, जिसके डर से आरोपी पक्ष के लोग घर छोड़कर भाग निकले।

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⚖️ पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी स्थिति

पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर क्रॉस मुकदमे दर्ज किए हैं:

पक्ष दर्ज मुकदमे (IPC/BNS) मुख्य आरोपी
पहला पक्ष हत्या, बलवा और आगजनी। 08 नामजद लोग।
दूसरा पक्ष हत्या और हत्या के प्रयास। 18 नामजद लोग।
  • गिरफ्तारियां/हिरासत: पुलिस ने अब तक 40 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं।

  • सुरक्षा व्यवस्था: गांव में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पीएसी (PAC) और पुलिस बल तैनात किया गया है।

  • पलायन: पुलिसिया कार्रवाई और बदले की भावना के डर से गांव के अधिकांश घरों में ताले लटके हैं और लोग सुरक्षित स्थानों पर भाग गए हैं।

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🔍 पुलिस की अगली चुनौती

एसएसपी हरिद्वार और स्थानीय पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार मुख्य हमलावरों को गिरफ्तार करना और गांव में दोबारा शांति व्यवस्था कायम करना है। पुलिस सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो के जरिए दंगा भड़काने वाले असली उपद्रवियों की पहचान कर रही है।

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