चमोली: शराब की बिक्री ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; एक साल में गटक गए 92.84 करोड़ की शराब
चमोली जिले से आबकारी विभाग (Excise Department) के लिए वित्तीय मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। साल 2025-26 के आंकड़ों ने राजस्व के पिछले तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जहाँ विभाग इस भारी मुनाफे से उत्साहित है, वहीं पहाड़ के सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग इस बढ़ती खपत को लेकर चिंतित हैं।
यहाँ चमोली जिले में शराब की बिक्री और भविष्य के लक्ष्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
गोपेश्वर/चमोली (3 अप्रैल 2026): जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मण बिष्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चमोली जिले में शराब के शौकीनों ने सरकारी खजाने को जमकर भरा है।
1. वित्तीय वर्ष 2025-26 का रिपोर्ट कार्ड
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कुल बिक्री: ₹92.84 करोड़।
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उपलब्धि: यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। विभाग के अनुसार, सभी दुकानों का संचालन नियमानुसार हुआ और किसी भी दुकान की देयता (Dues) बकाया नहीं है।
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राजस्व: इस भारी बिक्री से उत्तराखंड सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
2. भविष्य के ‘ऊंचे’ लक्ष्य (Targets)
आबकारी विभाग ने मौजूदा रुझान को देखते हुए भविष्य के लिए और भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
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वित्तीय वर्ष 2026-27: ₹99 करोड़ का लक्ष्य।
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वित्तीय वर्ष 2027-28: ₹103 करोड़ का लक्ष्य।
3. ‘आय’ बनाम ‘सामाजिक प्रभाव’
एक तरफ जहाँ विभाग और सरकार राजस्व बढ़ने से खुश हैं, वहीं दूसरी ओर इसके सामाजिक दुष्परिणामों पर चर्चा तेज हो गई है:
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सामाजिक चिंता: सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में शराब की इतनी अधिक खपत पारिवारिक संरचना और युवाओं के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
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शराब बंदी वाले गांव: चमोली के कई गांवों में ग्रामीणों (विशेषकर महिला मंगल दलों) ने अपने स्तर पर शराब बंदी लागू की हुई है, लेकिन जिले के कुल आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
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रणनीति: बढ़ते लक्ष्य यह दर्शाते हैं कि सरकार की राजस्व नीति शराब के विस्तार पर केंद्रित होती जा रही है।

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